क्या ईरान युद्ध पर कांग्रेस में मतभेद है? थरूर और मनीष तिवारी के बयानों से संशय
क्या है खबर?
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के दो तरफा हमलों को लेकर कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर चुप्पी साधने का आरोप लगा रही है, जबकि उसके नेता सरकार के समर्थन में बयान दे रहे हैं। ऐसे में यह समझा जा रहा है कि कांग्रेस में एक बार फिर किसी प्रमुख मुद्दे को लेकर पार्टी नेताओं के बयानों में एकरूपता नहीं है। अब सांसद मनीष तिवारी और शशि थरूर के बयानों पर सवाल उठ रहे हैं।
बयान
शशि थरूर ने क्या कहा?
तिरुवनन्तपुरम से सांसद थरूर ने इंडियन एक्सप्रेस पर लेख लिखकर यह जाहिर किया कि भारत की चुप्पी को कायरता नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई पर तुरंत शोक जताना चाहिए था, लेकिन युद्ध पर चुप्पी सही है, जो किसी का समर्थन नहीं करता। उन्होंने लिखा कि मध्य पूर्व में भारत का बहुत कुछ दांव पर है, ऐसे में खुले तौर पर युद्ध की निंदा करके विशुद्ध रूप से नैतिक रुख नहीं अपना सकता।
बयान
मनीष तिवारी ने क्या कहा?
चंडीगढ़ से लोकसभा सांसद तिवारी ने एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में कहा कि यह भारत का युद्ध नहीं है और मध्य पूर्व में भारत की भूमिका हमेशा से सीमित रही है। उन्होंने कहा कि देश के 4.8 करोड़ प्रवासी लोग वहां रहते हैं और तेल-गैस के अलावा उर्वरक पर भी भारत की निर्भरता खाड़ी देशों पर है, ऐसे में भारत का सावधानी बरतना सही दिशा में जाना है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता का यही अर्थ है।
सवाल
चुप्पी पर राहुल गांधी उठा चुके हैं सवाल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत के रूख पर कहा था कि किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष की मृत्यु पर प्रधानमंत्री का चुप रहना मतलब हत्या को समर्थन देना है। उन्होंने लिखा था, 'करोड़ों लोग अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। सुरक्षा संबंधी चिंताएं वास्तविक हैं, लेकिन संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले हमले संकट को और बदतर बना देंगे। ईरान पर एकतरफा हमले, साथ ही ईरान द्वारा अन्य मध्य पूर्वी देशों पर हमले, दोनों की निंदा की जानी चाहिए।'
सवाल
भारत ने खामेनेई की हत्या की 5 दिन बाद की थी निंदा
ईरानी नेता खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले में मौत हो गई थी। इसी दिन युद्ध की शुरआत हुई थी। भारत ने मामले में 5 दिन तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जबकि अन्य प्रभावित देशों के साथ बातचीत जारी रखी। विपक्ष के सवाल उठाने के बीच विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में ईरानी दूतावास में जाकर खामेनई के निधन पर शोक जताया था और शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे।