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कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश का नाम भी मतदाता सूची से हटा, जानिए पूरा मामला
कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश का नाम भी मतदाता सूची से हटाया गया

कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश का नाम भी मतदाता सूची से हटा, जानिए पूरा मामला

Mar 27, 2026
10:13 am

क्या है खबर?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया गया। इसमें लाखों की संख्‍या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। वर्तमान में गलती से हटाए गए नामों की शिकायतों का समाधान किया जा रहा है। इस दौरान चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कलकत्ता हाई कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश और पश्चिम बंगाल में औकाफ बोर्ड के अध्यक्ष साहिदुल्ला मुंशी का ही मतदाता सूची से हटा दिया गया है।

कार्रवाई

हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों के निर्णय के बाद हटाया गया नाम

यह कार्रवाई हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों की सुनवाई (न्यायिक निर्णय) के बाद की गई है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। मुंशी ने फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा, "यह चौंकाने वाला था। फैसले के बाद मेरा नाम हटा दिया गया है, लेकिन मेरी पत्नी और बड़े बेटे के नाम अभी भी विचाराधीन हैं। मेरा छोटा बेटा नया मतदाता है जिसने फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन किया था और उसे EPIC नंबर मिल गया है।"

बयान

मुंशी ने क्या दिया बयान?

मुंशी ने कहा, "मैं 2013 से 2020 तक हाई कोर्ट का न्यायाधीश था। मेरा और मेरी पत्नी का नाम 2002 की मतदाता सूची में था। मैंने 2002 की सूची, पासपोर्ट, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज जमा किए। यहां तक ​​कि मतदाता नियंत्रण अधिकारी भी हैरान थे कि मुझे सुनवाई के लिए क्यों बुलाया गया और उन्होंने आश्वासन दिया कि मेरा नाम दोषमुक्त कर दिया जाएगा, लेकिन फिर मामला विचाराधीन कर दिया गया। मुझे नहीं पता कि यह सब कैसे हुआ।"

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SIR

SIR के बाद आए 60 लाख से अधिक दावे

राज्य में SIR के बाद 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इसके तहत 60 लाख से अधिक दावों को हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों के पास जांच के लिए भेजा गया है। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक करीब 32 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है, जिनमें से लगभग 35 से 40 प्रतिशत नामों को सूची से हटा दिया गया है। इन हटाए गए नामों में मुंशी का भी नाम शामिल है।

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अपील

मुंशी को अब दाखिल करनी होगी अपील

मुंशी ने HT से कहा, "मुझे ट्रिब्यूनल में अपील दायर करनी होगी। मुझे नहीं बताया गया है कि मेरा नाम क्यों हटाया है। मैं किसी को दोष नहीं देता। मुझे लगता है कि सब कुछ इतनी जल्दबाजी में हुआ कि उन्होंने दस्तावेजों की ठीक से जांच नहीं की होगी। मैंने अपना पासपोर्ट इसलिए जमा किया ताकि इस पर कोई विवाद न हो सके।" बता दें कि आयोग ने दावों को निपटाने के लिए 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों का गठन किया है।

आरोप

TMC ने चुनाव आयोग पर लगाया आरोप

मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव आयोग पर किसी भी तरह भाजपा को जिताने का आरोप लगाया है। TMC के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, "चुनाव आयोग भाजपा का गुलाम बन गया है। इस तरह चुनाव कराने की क्या जरूरत है? इससे बेहतर होता कि वे चुनाव होने से पहले ही भाजपा को विजेता घोषित कर देते। चुनाव आयोग का आदर्श वाक्य समावेशिता होना चाहिए था। इसके बजाय वे अंधाधुंध नाम हटाने में लगे रहे।"

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