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DUSU चुनाव 2026: कौन हैं दीपांशु शौकीन, जिन्होंने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर रचा इतिहास?
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद शानदार जीत दर्ज की है

DUSU चुनाव 2026: कौन हैं दीपांशु शौकीन, जिन्होंने उपाध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर रचा इतिहास?

Sep 19, 2026
09:58 pm

क्या है खबर?

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026 में निर्दलीय प्रत्याशी दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष पद पर 30,615 वोट हासिल कर एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के ईशू मौर्या को 13,705 वोटों के भारी अंतर से पराजित किया। इसी तरह भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के वीर चतरथ मात्र 4,313 वोट हासिल करते हुए तीसरे स्थान पर रहे। ऐसे में आइए जानते हैं दीपांशु शौकीन कौन हैं और उन्होंने कैसे जीत दर्ज की।

परिचय

कौन हैं दीपांशु शौकीन?

दीपांशु मूल रूप से दिल्ली के पीरागढ़ी गांव के निवासी हैं। उनके पिता एक बस कंडक्टर हैं और माता एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं।

उनका परिवार चाहता था कि वे संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी करें, लेकिन उन्होंने छात्र राजनीति को अपना कार्यक्षेत्र चुना।

वर्तमान में वह दिल्ली विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग के छात्र हैं। इससे पूर्व उन्होंने अपनी स्नातक की शिक्षा शहीद भगत सिंह कॉलेज से पूरी की थी।

बगावत

NSUI से बगावत कर बने निर्दलीय उम्मीदवार

दीपांशु के लिए छात्र संघ के शीर्ष पद तक पहुंचने का मार्ग सीधा नहीं था।

उन्होंने शुरुआत में NSUI के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी की थी और उनका नामांकन भी दाखिल कर दिया था। हालांकि, बाद में संगठन द्वारा उन्हें अपना नामांकन वापस लेने के लिए कहा गया।

दीपांशु ने संगठन के निर्णय के आगे झुकने से इनकार कर दिया और एक बागी (निर्दलीय) प्रत्याशी के रूप में चुनावी समर में उतरने का साहसिक फैसला किया।

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हादसा

सत्य निकेतन हादसे ने कैसे बदल दी दीपांशु की जिंदगी?

इस वर्ष DUSU के चुनावी अभियान में छात्र सुरक्षा, आवास और बुनियादी ढांचे प्रमुख मुद्दे थे।

सत्य निकेतन में हुए दुखद हादसे के बाद दीपांशु छात्रों की समस्याओं को लेकर अत्यधिक मुखर हो गए थे।

उन्होंने पीड़ित छात्रों को न्याय मिलने तक जूते न पहनने (नंगे पैर रहने) का संकल्प लिया था।

उनका यह अनोखा विरोध प्रदर्शन छात्रों के बीच उनकी गहरी पैठ और जनसामान्य की छवि का एक प्रमुख प्रतीक बन गया, जिसने उन्हें चुनावी बढ़त दिलाई।

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चुनौती

दीपांशु का आगामी भविष्य और चुनौतियां

बिना किसी बड़े राजनीतिक संगठन के समर्थन के DUSU के केंद्रीय पैनल में जगह बनाकर दीपांशु ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।

अब उपाध्यक्ष के रूप में उनके सामने विश्वविद्यालय में हॉस्टल की किल्लत दूर करने और कैंपस सुरक्षा को मजबूत करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।

हालांकि, इन जिम्मेदारियों को पूरा करने में उन्हें DUSU प्रशासन की नीतियों का भी डटकर सामना करना होगा।

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