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कृषि विधेयक: कार्यवाही के दौरान नियमों के उल्लंघन पर उपसभापति की सफाई, आरोपों को किया खारिज

कृषि विधेयक: कार्यवाही के दौरान नियमों के उल्लंघन पर उपसभापति की सफाई, आरोपों को किया खारिज

Sep 28, 2020
09:20 am

क्या है खबर?

राज्यसभा उपसभापति हरिवंश सिंह ने 20 सितंबर को कृषि विधेयकों पर कार्यवाही के दौरान नियमों के उल्लंघन की मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज किया है। उन्होंने मिनट-दर-मिनट सदन की कार्यवाही का ब्यौरा देते हुए नियमों के उल्लंघन के सभी आरोपों को खारिज किया और सबूत के तौर पर कुछ कार्यवाही के कुछ वीडियो भी पेश किए। उन्होंने दोहराया कि वोटिंग की मांग करते समय विपक्षी सांसद अपनी सीट पर नहीं थे, जो कि नियमों के तहत अनिवार्य होता है।

मामला

क्या है पूरा मामला?

किसानों के गुस्से का केंद्र बने मोदी सरकार के दो कृषि विधेयक 20 सितंबर ध्वनि मत के जरिए राज्यसभा से पारित हुए थे और इस दौरान सदन में काफी हंगामा हुआ था। हंगामे के दौरान उपसभापति हरिवंश के साथ अमर्यादित व्यवहार के लिए सभापति वेंकैया नायडू ने आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया था। वहीं विपक्ष ने उपसभापति और सरकार पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा था कि वोटिंग होने पर विधेयक पारित नहीं हो पाते।

आरोप

क्या थे विपक्ष के आरोप?

विपक्ष ने आरोप लगाए थे कि उसके बार-बार मांग करने के बावजूद सरकार ने विधेयकों के स्थाई समिति को भेजे जाने पर वोटिंग नहीं कराई और जल्दबाजी में विधेयकों को ध्वनि मत के जरिए पारित घोषित कर दिया। इसके अलावा विपक्ष ने ये भी कहा था कि 12 विपक्षी पार्टियों के सदन की कार्यवाही तय समय से आगे न बढ़ाने की मांग के बावजूद उपसभापति ने कार्यवाही का समय बढ़ा दिया जो राज्यसभा के नियम 37 का उल्लंघन है।

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सरकार का पक्ष

सरकार ने क्या दावा किया था?

मामले पर सरकार ने कहा था कि वोटिंग की मांग करते वक्त विपक्षी सांसद अपनी सीटों पर नहीं थे और इसलिए नियमों के मुताबिक उनकी मांगों को अस्वीकार कर ध्वनि मत से विधेयक पारित कराए गएष कार्यवाही का समय बढ़ाने पर सरकार ने कहा कि संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कार्यवाही का समय बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था जिसे स्वीकार कर लिया गया। सरकार के मुताबिक, संसद में ऐसा होता रहा है और ये सामान्य प्रक्रिया है।

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सवाल

राज्यसभा की फुटेज ने उठाए सरकार के दावे पर सवाल

हालांकि कल विभिन्न मीडिया संगठनों द्वारा प्राप्त की गई राज्यसभा की फुटेज से सरकार के दावों पर सवाल उठे थे। इस फुटेज में देखा जा सकता है कि विधेयकों को स्थाई समिति के पास भेजने के लिए वोटिंग की मांग करते वक्त कम से कम दो सांसद DMK सांसद तिरूचि सिवा और CPM सांसद केके रागेश अपनी सीटों पर थे। इसके अलावा विपक्ष के विरोध के बावजूद उपसभापति को कार्यवाही का समय बढ़ाते हुए भी देखा जा सकता है।

सफाई

हरिवंश ने मीडिया रिपोर्ट्स को किया खारिज

अब इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए उपसभापति हरिवंश ने कहा, "श्री केके रागेश का विधेयकों को स्थाई समिति के पास भेजने का प्रस्ताव सदन ने 1:07 बजे ध्वनि मत के जरिए खारिज कर दिया था क्योंकि उस समय श्री रागेश सदन के वेल में थे और गैलरी में अपनी सीट पर नहीं थे। वीडियो में ये देखा जा सकता है कि जब मैंने उनके प्रस्ताव को संशोधन को लिया और गैलरी की तरफ देखा तो वह वहां नहीं थे।"

बयान

तिरूची सिवा के प्रस्ताव पर बोले उपसभापति- विपक्षी सांसदों ने घेरा हुआ था

वहीं तिरूची सिवा के प्रस्ताव पर हरिवंश ने कहा, "ये सच है कि श्री तिरूचि सिवा ने अपनी सीट से 1:10 बजे विधेयक को स्थाई समिति के पास भेजने के अपने प्रस्ताव पर वोटिंग की मांग की। आप इसी वीडियो में देखेंगे कि लगभग 1:09 बजे एक सदस्य रूल बुक को फाड़कर मेरे ऊपर फेंक रहे थे। इसके साथ ही मुझे कुछ विपक्षी सांसदों ने घेरा हुआ था जो मुझसे कागज छीनने की कोशिश कर रहे थे।"

बयान

वोटिंग के लिए सदन व्यवस्थित होना जरूरी- उपसभापति

हरिवंश ने आगे कहा, "आप ये मानेंगे कि नियमों और प्रथा के अनुसार वोटिंग के लिए दो चीजें आवश्यक हैं। पहली कि वोटिंग की मांग होनी चाहिए, वहीं इतना ही महत्वपूर्ण है कि सदन व्यवस्थित हो।"

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