पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का 94 साल की उम्र में निधन
क्या है खबर?
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और केंद्र में मंत्री रहीं मोहसिना किदवई का बुधवार को 94 साल की आयु में निधन हो गया। उन्होंने सुबह 4 बजे दिल्ली के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। उन्हें 8 अप्रैल को उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भर्ती कराया गया था। उनका पार्थिव शरीर नोएडा स्थित घर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। बुधवार शाम 5 बजे उन्हें निजामुद्दीन के पास स्थित कब्रिस्तान में सुपर्द-ए-खाक किया जाएगा।
जीवन
नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक, सभी की करीबी
मोहसिना जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के अहमदपुर गांव में जन्मी थीं। उन्होंने रूढ़ीवादी मुस्लिम परिवार से होने के बावजूद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। उन्होंने 1953 में खलील किदवई से विवाह किया। उनके ससुर जामिलुर रहमान किदवई कांग्रेस के प्रमुख नेता थे, जिससे वह राजनीति की ओर बढ़ी। मोहसिना की 3 बेटियां हैं। मोहसिना ऐसी नेता रहीं, जो अपने जीवन में पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की खास रहीं।
राजनीतिक करियर
उत्तर प्रदेश से शुरू किया राजनीतिक सफर
मोहसिना 1960 के दशक में राजनीति में पूरी तरह सक्रिय हुईं। उन्होंने उत्तर प्रदेश से शुरूआत करके केंद्र तक पहुंच बनाई और कांग्रेस की मजबूत स्तंभ बनीं। मोहसिना 28 साल की उम्र में 1960-1974 तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्य रहीं। इसके बाद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री और लघु उद्योग मंत्री का जिम्मा संभाला। उन्होंने 1974 में बाराबंकी की दरियाबाद से विधानसभा और इमरजेंसी के बाद 1978 में 6वीं लोकसभा में आजमगढ़ से लोकसभा उपचुनाव जीता था।
जुड़ाव
2016 में संसद से सेवानिवृत्ति के बाद भी पार्टी से जुड़ाव
इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी के कहने पर मोहसिना ने आजमगढ़ से जनता पार्टी के राम नरेश यादव को हराकर उपचुनाव जीता और पहचान बना ली। इसके बाद 1980 से 1989 तक मेरठ की 2 बार सांसद रहीं। उन्होंने इंदिरा और राजीव गांधी की सरकार में स्वास्थ्य, परिवहन, शहरी विकास, पर्यटन और ग्रामीण विकास मंत्रालय की बागडोर संभाली। वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष भी रहीं और 2016 में संसद से सेवानिवृत्ति के बाद भी पार्टी से जुड़ी रहीं।