अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार को मिले SIR नोटिस, AAP ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
क्या है खबर?
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार को चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें यह नोटिस 'अंतिम SIR से अप्रकाशित' श्रेणी के तहत जारी किए हैं। केजरीवाल, उनकी पत्नी सुनीता, पिता गोविंद राम, माता गीता देवी और बेटे पुलकित को ये नोटिस प्राप्त हुए हैं। इसके बाद दिल्ली की सियासत गरमा गई है।
नोटिस
विधानसभा क्षेत्र 40 में नोटिस प्राप्त करने वाले 110 लोगों में शामिल हैं केजरीवाल
केजरीवाल परिवार उन 110 लोगों में शामिल है जिन्हें नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र 40 के एक विशेष हिस्से में SIR नोटिस प्राप्त हुए हैं।
SIR के तहत दिल्ली के कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47.7 लाख मतदाताओं के नाम प्रारंभिक ड्राफ्ट सूची से बाहर कर दिए गए हैं।
बाहर किए गए लोगों को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, नकली और अन्य मतदाता के रूप में 'अनकलेक्टेबल' (प्राप्त नहीं किए जा सकने वाले) मानकर बाहर कर दिया गया है।
हमला
AAP ने बोला आयोग पर हमला
इस गंभीर गड़बड़ी के सामने आने के तुरंत बाद AAP ने सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग को आड़े हाथों लेते हुए बड़ा निशाना साधा है।
पार्टी ने एक्स पर लिखा, 'क्या इस देश में सब कुछ केवल परम पिता को खुश रखने के लिए ही हो रहा है? चुनाव आयोग, यह कैसे संभव है कि 3 बार के दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम दिल्ली की मतदाता सूची से गायब हैं?'
नोटिस
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी मिला नोटिस
इस विशेष पुनरीक्षण अभियान की जद में केवल केजरीवाल ही नहीं, बल्कि वर्तमान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी आई हैं।
शालीमार बाग निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में उनके और उनके माता-पिता की आयु के बीच 15 वर्ष से कम का अंतर दर्ज होने के कारण उन्हें नोटिस जारी हुआ था।
हालांकि, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) ने स्पष्ट किया कि उनके विवरण का सत्यापन हो चुका है और उन्हें अंतिम सूची में जोड़ दिया गया है।
स्पष्टीकरण
मुख्य निर्वाचन अधिकारी और आयोग ने दिया स्पष्टीकरण
AAP के आरोप के बाद चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनके नाम सूची में सुरक्षित हैं और नोटिस केवल तकनीकी विसंगतियों के कारण जारी किए गए हैं।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अशोक कुमार ने कहा, "नोटिस 2 प्रकार के हैं। एक उन अनमैप्ड मतदाताओं के लिए, और दूसरा उन मैप्ड मतदाताओं के लिए जिनके नामों या जन्मतिथि आदि में छोटी-मोटी विसंगतियां हैं।"
आंकड़े
रोहिणी में हुआ सबसे अधिक 83.43 प्रतिशत डिजिटलीकरण
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, मतदाता सूचियों के डिजिटलीकरण का सबसे ज्यादा असर रोहिणी में देखने को मिला है, जहां 83.43 प्रतिशत डिजिटलीकरण हुआ है।
इसी तरह ओखला में सबसे खराब स्थिति रही, जहां 3.62 लाख फॉर्म में से 45.32 प्रतिशत यानी 1.64 लाख से अधिक फॉर्म अनकलेक्टेबल श्रेणी में डाले गए हैं।
इसके अलावा, चांदनी चौक में 38.98 प्रतिशत, बल्लीमारान 32.65 और सीलमपुर में 23.37 प्रतिशत लोगों के नाम हटाए गए हैं।
प्रकिया
आगे की प्रक्रिया और अंतिम तारीख
चुनाव आयोग के CEO के अनुसार, वर्तमान में दावों और आपत्तियों का चरण चल रहा है।
31 अगस्त से 16 सितंबर के बीच 91,826 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 22,715 आवेदन सुधार या संशोधन के लिए और 922 आवेदन नाम हटाने के लिए हैं।
आयोग के अधिकारी इन सभी आवेदनों की जांच करेंगे और 29 अक्टूबर, 2026 तक इनका निपटारा कर लेंगे।
इसके बाद दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 4 नवंबर, 2026 को किया जाएगा।