45 डिग्री सेल्सियस की गर्मी शरीर के लिए क्यों मानी जाती है खतरनाक?
क्या है खबर?
देशभर में लोग गर्मी से बेहाल हैं। चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के बीच पसीने से भीगे हुए हैं। राजधानी दिल्ली के हालात और भी ज्यादा खराब हो गए हैं। दिल्ली में 18 मई यानी सोमवार महीने का सबसे गर्म दिन रहा। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अनुमान लगाया है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ेगा। ऐसे में आइए जानते हैं कि ऐसे मौसम का शरीर पर क्या असर पड़ता है।
अलर्ट
दिल्ली-NCR में लू का येलो अलर्ट जारी
दिल्ली में अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने कहा है कि उत्तर पश्चिम भारत में तापमान 44-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। IMD ने दिल्ली और NCR के लिए लू का येलो अलर्ट भी जारी किया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गर्मी उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और मानसून पूर्व वर्षा की अनुपस्थिति का परिणाम है।
परेशानी
दिल्ली में फिलहाल गर्मी से राहत के आसार नहीं
स्काईमेट वेदर के वाइस प्रेसिडेंट महेश पलावत ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों से आने वाली सूखी हवाएं दिल्ली में तापमान बढ़ा रही हैं, फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। पलावत ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि थार रेगिस्तान क्षेत्र से होकर गुजरने वाली उत्तर-पश्चिमी हवाएं दिल्ली पहुंचने से पहले ही सूखी हो जाती हैं, जिससे सतह के पास गर्मी फंस जाती है और पूरे शहर में स्थिति और खराब हो जाती है।
सलाह
डॉक्टरों ने दी गर्मी से सतर्क रहने की सलाह
दिल्ली और उत्तरी भारत में बढ़ती गर्मी शरीर पर गंभीर असर डाल सकती है। डॉक्टरों के अनुसार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान दिमाग, त्वचा और आंतों तक को प्रभावित कर सकता है। रोहैम्पटन विश्वविद्यालय के शोध में पाया गया कि 35 डिग्री सेल्सियस पार करते ही सांसें तेज और हृदय गति बढ़ने लगती है। वहीं 40 डिग्री के आसपास शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, जिससे ऊर्जा की खपत बढ़ जाती है।
खतरा
हीट स्ट्रोक बन सकता है जानलेवा
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी से रक्त वाहिकाएं खुल जाती हैं। इससे बल्ड प्रेशर कम हो जाता है और शरीर में रक्त पहुंचाने के लिए हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। हीट स्ट्रोक जानलेवा होता है। इससे मस्तिष्क में सूजन आ सकती है, जिससे सिरदर्द और गंभीर मामलों में दौरे भी पड़ सकते हैं। पीड़ित व्यक्ति की चेतना का स्तर भी बदल जाता है, जिसमें भ्रम, प्रलाप, बेचैनी और यहां तक कि बेहोशी भी शामिल है।
आवश्यकता
गर्मी में शरीर को हाइड्रेट रखना है बेहद जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने तेज गर्मी में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सीधी धूप शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे तापमान संतुलित रखना मुश्किल हो जाता है। डॉक्टर ऋचा जोटवानी के अनुसार सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच बाहर निकलने से बचना चाहिए। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए खूब पानी पीएं, पानी से भरपूर फल-सब्जियां खाएं और खूब ओआरएस पीएं। धूप में निकलते वक्त सनस्क्रीन लगाना भी जरूरी है।