आपकी सोने की अवधि से भी बढ़ सकती है माइग्रेन की परेशानी, अध्ययन में हुआ खुलासा
क्या है खबर?
माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल परेशानी है, जिसमें सिर के एक या दोनों तरफ तेज दर्द होता है। यह सामान्य सिरदर्द से ज्यादा गंभीर होता है। ज्यादातर लोगों को यह परेशानी तनाव, गलत खान-पान, ठंड लगने या फिर नींद की कमी से हो सकती है। हालांकि, हाल के एक अध्ययन से सामने आया है कि इसकी वजह सोने की अवधि भी हो सकती है। अगर आप ज्यादा या कम सोते हैं तो भी आपको सिरदर्द से जूझना पड़ सकता है।
अध्ययन
ज्यादा सोने वालों को होती है ज्यादा परेशानी
इस अध्ययन को 2023 में हुए एक पुराने HeAD-US (अमेरिका) अध्ययन के आंकड़ों का विश्लेषण करके पूरा किया गया था।
इससे सामने आया कि जिन माइग्रेन से पीड़ित वयस्कों ने बताया कि वे रात में औसतन 6 घंटे या उससे कम या 10 घंटे या उससे ज्यादा सोते हैं, उन्हें सिरदर्द का अनुभव काफी ज्यादा होता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि कम सोने वालों की तुलना में ज्यादा सोने वालों को ज्यादा सिरदर्द झेलना पड़ता है।
प्रक्रिया
इस तरह पूरा किया गया अध्ययन
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने माइग्रेन से पीड़ित 6,267 वयस्कों के डाटा का क्रॉस-सेक्शनल विश्लेषण किया था। इन लोगों की औसत उम्र 41.5 साल थी और इनमें से 91.7 प्रतिशत महिलाएं थीं।
प्रतिभागियों ने रात में अपनी औसत नींद की अवधि और सिरदर्द के लक्षणों के बारे में बताया और 'अमेरिकन माइग्रेन स्टडी/अमेरिकन माइग्रेन प्रीवलेंस एंड प्रिवेंशन' माइग्रेन डायग्नोस्टिक मॉड्यूल को पूरा किया।
नींद की अवधि को कम, सामान्य और लंबी श्रेणियों में बांटा गया था।
जांच
तनाव और अन्य बिंदुओं पर भी किया गया गौर
अध्ययन के दौरान तनाव, अवसाद और चिंता पर भी गौर किया गया था। इसके लिए प्रतिभागियों से प्रश्नावली भरवाई गईं थीं।
शोधकर्ताओं ने उम्र, लिंग, शिक्षा और अवसाद व चिंता के लक्षणों को ध्यान में रखते हुए नींद की अवधि और महीने में सिरदर्द वाले दिनों की संख्या (MHDs) और महसूस किए गए तनाव के बीच संबंधों का विश्लेषण किया।
प्रतिभागियों में से 35.3 प्रतिशत कम, 62.2 प्रतिशत सामान्य और 2.5 प्रतिशत लंबी नींद लेते थे।
नतीजे
क्या रहे अध्ययन के नतीजे?
सामान्य की तुलना में कम नींद वालों को माइग्रेन होने की 10.9 प्रतिशत ज्यादा संभावना थी और उनका माइग्रेन से होने वाली अक्षमता (MIDAS) का स्कोर 13.6 प्रतिशत था।
वहीं, सामान्य नींद की तुलना में लंबी नींद लेने वालों को माइग्रेन होने की संभावना 27.1 प्रतिशत ज्यादा थी और उनका MIDAS स्कोर 66 प्रतिशत था। इन नतीजों से पता चलता है कि नींद की खराब अवधि और ज्यादा तनाव का माइग्रेन को और गंभीर कर सकते हैं।