LOADING...
हाइपोथायरायडिज्म बनाम हाइपरथायरायडिज्म: दोनों स्थितियों में क्या है अंतर?
हाइपोथायरायडिज्म बनाम हाइपरथायरायडिज्म

हाइपोथायरायडिज्म बनाम हाइपरथायरायडिज्म: दोनों स्थितियों में क्या है अंतर?

लेखन सयाली
Jun 15, 2026
07:55 pm

क्या है खबर?

थायराइड ग्रंथि हमारे शरीर की एक अहम ग्रंथि होती है। यह ग्रंथि हार्मोन बनाती है, जो शरीर में कई जरूरी कार्यों को नियंत्रित करती है। थायराइड ग्रंथि से जुड़े 2 प्रमुख विकार होते हैं हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म। ये दोनों विकार थायराइड हार्मोन के असंतुलन के कारण होते हैं, लेकिन इनके लक्षण और उपचार अलग-अलग होते हैं। आइए जानते हैं इन दोनों के बीच क्या अंतर होते हैं, ताकि आप अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख सकें।

हाइपोथायरायडिज्म

हाइपोथायरायडिज्म क्या है?

हाइपोथायरायडिज्म एक ऐसी स्थिति है, जिसमें थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बनाती। इससे शरीर में थायराइड हार्मोन की कमी हो जाती है, जिससे कई समस्याएं हो सकती हैं। इस स्थिति में शरीर की ऊर्जा कम होती है, जिससे वजन बढ़ना, थकान, त्वचा का सूखापन और बालों का झड़ना जैसी समस्याएं खड़ी होने लग जाती हैं। इस विकार से ग्रस्त लोगों को अक्सर ठंड का अधिक अनुभव होता है।

हाइपरथायरायडिज्म

हाइपरथायरायडिज्म क्या है?

हाइपरथायरायडिज्म एक ऐसी स्थिति है, जिसमें थायराइड ग्रंथि अधिक मात्रा में हार्मोन बनाती है। इससे शरीर में थायराइड हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो कई तरह की समस्याओं का कारण बन सकता है। इस स्थिति में शरीर की ऊर्जा तेज हो जाती है, जिससे वजन घटना, अनिद्रा, घबराहट, पसीना आना और बालों का झड़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस विकार से ग्रस्त लोगों को गर्मी का अधिक अनुभव होता है।

Advertisement

लक्षण

दोनों विकारों के लक्षण

हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों में थकान, वजन बढ़ना, त्वचा का सूखापन, बालों का झड़ना और ठंड का अधिक अनुभव शामिल हैं। वहीं, हाइपरथायरायडिज्म के लक्षणों में वजन घटना, अनिद्रा, घबराहट, पसीना आना और गर्मी का अधिक अनुभव शामिल हैं। इन दोनों विकारों के कुछ लक्षण समान हो सकते हैं। ऐसे में सही पहचान करना जरूरी है, ताकि उचित उपचार किया जा सके। सही पहचान के लिए डॉक्टर से संपर्क करना महत्वपूर्ण है।

Advertisement

इलाज

दोनों विकारों के इलाज

हाइपोथायरायडिज्म का इलाज आमतौर पर थायराइड हार्मोन की कमी को पूरा करने वाली दवाइयों द्वारा किया जाता है। इसके अलावा संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जरूरी हैं। वहीं, हाइपरथायरायडिज्म का इलाज आमतौर पर दवाइयों, रेडियोधर्मी आयोडीन थेरेपी या ऑपरेशन द्वारा किया जाता है। दोनों स्थितियों के लिए समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है, ताकि सही समय पर उचित इलाज मिल सके और शरीर हमेशा स्वस्थ बना रहे।

Advertisement