जोजिला सुरंग को क्यों माना जा रहा पाकिस्तान और चीन के खिलाफ भारत का जवाब?
क्या है खबर?
भारत ने मंगलवार को एक अहम उपलब्धि हासिल की। आज जम्मू-कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाले जोजिला सुरंग का अंतिम निर्माण कार्य पूरा हो गया है। मंगलवार को 13.15 किलोमीटर लंबी सुरंग का आखिरी 'ब्रेकथ्रू' हुआ, जिससे सुरंग का कश्मीर और लद्दाख का सिरा आपस में जुड़ गया। यह सुरंग भारत के लिए सिर्फ 2 राज्यों के बीच सिर्फ संपर्क ही बेहतर नहीं बनाएगी बल्कि पाकिस्तान और चीन के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक तैयारी भी है। आइए जानते हैं कैसे।
खासियत
जोजिला सुरंग के बारे में जानिए
जोजिला सुरंग 13.15 किलोमीटर लंबी है, जो विश्व में सबसे अधिक समुद्र तल से 11,578 फीट की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है। इसका निर्माण जोजिला क्षेत्र में हो रहा है, जो बालटाल (सोनमर्ग) और मीनामर्ग (द्रास और कारगिल) के बीच में है। इसमें क्रमशः 457.35 मीटर और 1,953.63 मीटर लंबी 2 सुरंगें हैं। इसके अलावा, लगभग 2.35 किलोमीटर लंबी 7 कट-एंड-कवर संरचनाएं, 450 मीटर लंबी एक स्नो गैलरी और 460 मीटर की संयुक्त लंबाई वाले 3 पुल शामिल हैं।
सुरक्षा
सुरंग की सुरक्षा प्रणाली मजबूत
सुरंग की सबसे प्रभावशाली इंजीनियरिंग विशेषताओं में से एक इसकी वेंटिलेशन और सुरक्षा प्रणाली है। सुरंग में कोई अलग से निकास मार्ग नहीं है, इसलिए इंजीनियरों को वेंटिलेशन और आपातकालीन पहुंच के लिए 3 बड़े ऊर्ध्वाधर शाफ्ट बनाने पड़े। जोजिला सुरंग बनने से भारत के सबसे मुश्किल हिमालयी रास्तों में भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और बारिश के बाद भी हर मौसम में कनेक्टिविटी मिलेगी। सुरंग बनने से कश्मीर-लद्दाख के बीच यात्रा का समय 3 घंटे की जगह मात्र 30 मिनट होगा।
तैयारी
भारत की सैन्य तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण
हिमालयी गलियारे से गुजरने वाले इस मार्ग पर भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और खराब मौसम के कारण साल भर आना-जाना मुश्किल होता है। सर्दियों में स्थिति और खराब हो जाती है, जब यह क्षेत्र भारी बर्फबारी के कारण 6 महीने तक पूरी तरह कट जाता है। सुरंग बनने से सुरक्षा संबंधी पहलू मजबूत होंगे और स्थानीय निवासियों, पर्यटकों और व्यवसायियों को आराम मिलेगा। यह सुरंग लद्दाख, पूर्व में चीन और पश्चिम में पाकिस्तान के साथ सैन्य और परिचालन तैयारी मजबूत करेगा।
सीमापार
पाकिस्तान और चीन से मुकाबले के लिए क्यों जरूरी है सुरंग?
वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में लद्दाख केंद्र में था, जब पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) के पार भारतीय चौकियों पर कब्जा कर लिया था। इसका उद्देश्य कश्मीर-लद्दाख के बीच संपर्क तोड़ना, सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात सेना को अलग-थलग करना था। इसके बाद, 2020 में, पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच झड़प हुई। इस इतिहास को देखते हुए जोजिला सुरंग भारत को इस क्षेत्र में सैन्य आवाजाही और उपकरणों का सुचारू परिवहन करने में मदद करेगा।
आपूर्ति
रसद आपूर्ति और सैन्य आवाजाही में नहीं आएगी बाधा
ये सुरंग रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्रास, करगिल, लेह और आसपास के इलाकों में पूरे साल पहुंच बनाएगा और संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक पहुंच मजबूत करेगा। सुरंग श्रीनगर-कारगिल-लेह में सैन्य टुकड़ियों के लिए आपूर्ति मार्ग बनेगा और सैनिक काफिले, उपकरणों, रसद आपूर्ति की आवाजाही में बाधा नहीं आएगी। जोजिला सुरंग भारत के पर्वतीय अवसंरचना क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक का प्रतिनिधित्व करती है।
तैयारी
कब तक शुरू होगा मार्ग?
मंगलवार को ब्रेकथ्रू के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला उपस्थित थे। गडकरी ने बताया कि केंद्र ने 12,000 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट के मुकाबले 7,000 करोड़ रुपये में जोजिला सुरंग का निर्माण किया है। इस परियोजना के 2027 के अंत तक पूरी तरह से तैयार होने की उम्मीद है। सुरंग खुलने के बाद आंतरिक कार्य में लगभग 2 साल लगेंगे।
ट्विटर पोस्ट
जोजिला सुरंग में ब्रेकथ्रू का काम पूरा
इसे देखकर लग रहा है जल्दी श्रीनगर से लद्दाख की सैर करें। जिस जगह और जैसी कठिन परिस्थिति में इस काम को पूरा किया गया है वह तारीफ़ के लायक है! pic.twitter.com/ntwJfKXMg0
— Narendra Nath Mishra (@iamnarendranath) June 9, 2026