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भारत 2028 में COP33 की मेजबानी से क्यों हटा पीछे? प्रधानमंत्री मोदी ने रखा था प्रस्ताव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुबई जलवायु शिखर सम्मेलन में भारत में COP33 आयोजित करने का प्रस्ताव रखा था (फाइल तस्वीर)

भारत 2028 में COP33 की मेजबानी से क्यों हटा पीछे? प्रधानमंत्री मोदी ने रखा था प्रस्ताव

लेखन गजेंद्र
Apr 09, 2026
11:28 am

क्या है खबर?

भारत ने 2028 में होने वाले जलवायु शिखर सम्मेलन के 33वें संस्करण (COP33) की मेजबानी का प्रस्ताव चुपचाप वापस ले लिया है। इसकी पुष्टि सबसे पहले क्लाइमेट होम न्यूज ने की। पर्यावरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव रजत अग्रवाल ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के सचिवालय को भारत के इस निर्णय की सूचना दी है। मेजबानी का प्रस्ताव खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में दिया था। इसे वापस लेने के क्या कारण हैं? आइए, जानते हैं।

प्रस्ताव

प्रधानमंत्री मोदी ने दुबई में रखा था प्रस्ताव, बन गई थी समिति

प्रधानमंत्री मोदी ने 2023 में दुबई जलवायु शिखर सम्मेलन में यह प्रस्ताव रखा था। उन्होंने 1 दिसंबर, 2023 को अपने मुख्य भाषण में कहा था, "भारत जलवायु परिवर्तन प्रक्रिया के लिए संयुक्त राष्ट्र ढांचे के प्रति प्रतिबद्ध है...इसलिए, आज मैं इस मंच से 2028 में भारत में COP33 शिखर सम्मेलन की मेजबानी का भी प्रस्ताव रखता हूं।" इसके बाद, विदेश मंत्रालय की वेबसाइट ने इसकी पुष्टि की और सरकार ने COP33 के लिए 11 सदस्यीय उच्च-शक्ति परिषद भी बना दी।

कारण

आखिर अचानक क्यों पीछे हटा भारत?

अभी तक इस प्रस्ताव से पीछे हटने का कोई कारण सामने नहीं आया, लेकिन इसके पीछे सरकार की अति व्यस्तता बताई जा रही है। डाउन टू अर्थ ने कई वरिष्ठ केंद्रीय अधिकारियों के हवाले से बताया कि सरकार काफी समय से इस आयोजन से हटने का विचार कर रही थी। बाद में 2 अप्रैल को एशिया-प्रशांत समूह अध्यक्ष को जानकारी दी गई। एक जलवायु विशेषज्ञ बताते हैं कि सम्मेलन से देश पर जलवायु-संबंधी मोर्चे पर काम का दबाव बढ़ जाता।

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आयोजन

आम चुनाव और राष्ट्रमंडल खेल की चुनौती

एक केंद्रीय अधिकारी ने संभावना जताई कि शायद सरकार इस बड़े आयोजन की चुनौती में नहीं उलझना चाहती, क्योंकि 2029 में आम चुनाव हैं, जिसकी तैयारी में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। दूसरी तरफ, COP33 दो सप्ताह का बड़ा वैश्विक आयोजन है, जिसमें 200 देश और दुनिया से 75,000 प्रतिभागी शामिल होते हैं। इसके अलावा, 2030 में अहमदाबाद में राष्ट्रमंडल खेल भी प्रस्तावित है, जो भव्य होगा। ऐसे में 2-बड़े आयोजनों को सरकार संभालने से पीछे हट सकती है।

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आयोजन

अब कौन कराएगा आयोजन?

क्लाइमेट होम न्यूज़ के अनुसार, भारत के इस फैसले से COP33 की मेजबानी अधर में लट गई है। अब दक्षिण कोरिया एकमात्र ऐसा देश है जिसने 2028 के सम्मेलन में रुचि दिखाई है। इस पर अंतिम निर्णय दिसंबर तक होगा। हालांकि, 2026 में COP31 तुर्की में और COP32 इथियोपिया में 2027 में होगा। वार्षिक COP की मेजबानी का अधिकार संयुक्त राष्ट्र के 5 क्षेत्रीय समूहों को बारी-बारी मिलता है। COP33 का आयोजन एशिया-प्रशांत क्षेत्र के किसी देश में होना है।

झटका

भारत के लिए झटका?

डाउन टू अर्थ ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि भारत का इस समझौते से हटने का निर्णय देश के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन संबंधी कार्यों के लिए एक झटका होगा। वैश्विक जलवायु कार्यकर्ता हरजीत सिंह ने कहा कि COP33 की मेजबानी से भारत का पीछे हटना एक रणनीतिक चूक है और भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र समेत अन्य उपलब्धियों को प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर खो दिया है।

विरोध

कांग्रेस ने जताई हैरानी

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने फैसले पर हैरानी जताते हुए एक्स पर लिखा, 'मैं बहुत हैरान हूं। यह प्रधानमंत्री के एजेंडे में सबसे ऊपर था, खासकर इसलिए क्योंकि 2029 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। इसलिए माहौल बनाया गया होगा।' जयराम ने कहा कि 2024 के चुनाव से पहले भी मोदी सरकार ने नई दिल्ली में G-20 शिखर सम्मेलन आयोजित करके फायदा उठाया था, और इस बार भी यही चाहते थे, लेकिन अचानक पीछे हटना चौकाने वाला है।

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