जापान ने 20 साल बाद भारतीय आम के आयात पर क्यों लगाई है रोक?
क्या है खबर?
एक तरफ पूरी दुनिया भारतीय आमों की दीवानी है, वहीं दूसरी तरफ 20 सालों से भारतीय आम का स्वाद चख रहे जापान ने अब इसके आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। जापान के इस कदम से भारतीय आम निर्यातकों के कारोबार को नुकसान पहुंच रहा है, जो पहले ही पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण प्रभावित कारोबार से जूझ रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इसके पीछे क्या कारण है और इसका भारतीय कारोबार पर क्या असर पड़ सकता है।
जानकारी
भारत में हर साल कितना उत्पादन होता है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल विभिन्न किस्मों के रूप में 2.40 करोड़ मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है। इनमें से लगभग 32,000 मीट्रिक टन आम का निर्यात किया जाता है और बाकी की खपत देश के भीतर ही हो जाती है।
कारण
जापान ने भारतीय आम पर क्यों लगाया प्रतिबंध?
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जापान की एक निरीक्षण टीम ने उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित एक उत्पादन इकाई का निरीक्षण किया था, जिसमें कई अनियमितताएं मिली थी। उसके बाद जापान ने आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। बता दें कि हर साल जापान की एक टीम वाष्प ताप उपचार (VHT) की जांच के लिए भारत आती है। VHT एक गैर-रासायनिक संगरोध प्रक्रिया है जो गर्म और आर्द्र हवा में आमों को कीटों से मुक्त रखती है।
अधिसूचना
जापान ने क्या जारी की अधिसूचना?
जापान के एक जनहित संगठन योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा था कि 25 मार्च, 2026 या उसके बाद भारत द्वारा जारी प्रमाण पत्रों वाले आमों की खेप स्वीकार नहीं की जाएगी। इसमें यह भी कहा गया कि भारतीय कारखानों से ताजे आमों का आयात तब तक निलंबित रहेगा जब तक टोक्यो के अधिकारी इस बात से संतुष्ट नहीं हो जाते कि भारत में परिचालन मानकों में सुधार हो गया है।
निराशा
जापान के कदम से आम निर्यातकों में निराशा
जापान के कदम से आम निर्यातकों में निराशा है। उत्तर प्रदेश के निर्यातक अकरम बेग ने द प्रिंट से कहा, "जापानी बाजार उतना बड़ा नहीं है, फिर भी यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस साल घरेलू बाजार भी मुश्किलों का सामना कर रहा है और हमें नुकसान हो रहा है। वे हर कारखाने के आमों को कैसे अस्वीकार कर सकते हैं।" उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि निरीक्षण दल कारखानों को असफल घोषित करने के इरादे से ही भारत आया था।"
परेशानी
पश्चिम एशिया संकट के बीच और बढ़ी निर्यातकों की परेशानी
जापान के कदम से आम निर्यातकों की परेशानी और बढ़ गई है। निर्यातकों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट से कारण निर्यात में 20-30 प्रतिशत की गिरावट आई है। तेल की कीमतों में हुई वृद्धि ने निर्यातकों के लिए रसद संबंधी महत्वपूर्ण चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आम के परिवहन के लिए आवश्यक रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों की कमी और उनके शुल्क में लगभग 1,000 डॉलर (लगभग 96,000 रुपये) की बढ़ोतरी ने हालातों को और भी मुश्किल बना दिया है।
बयान
आम के निर्यात पर पड़ा प्रतिकूल प्रभाव
महाराष्ट्र के फ्रेश वेजिटेबल्स एंड फ्रूट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एकराम हुसैन ने कहा, "उच्च माल ढुलाई लागत, युद्धकालीन सरचार्ज और रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों की सीमित उपलब्धता ने मौसमी आम की किस्मों के निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।" उन्होंने कहा, "अप्रैल भारत में आम के चरम मौसम की शुरुआत का महीना है, जिसमें अल्फोंसो और बंगनपल्ली जैसी शुरुआती से मध्य गर्मियों की किस्में शामिल हैं। चुनौतियां न केवल पश्चिम एशिया को बल्कि अन्य गंतव्यों को भी प्रभावित कर रही हैं।"
रिश्ता
जापान और भारत का आमों का रिश्ता
जापान में भारतीय आमों की बहुत मांग है। 2025 में टोक्यो ने 15 लाख डॉलर (लगभग 14.37 करोड़ रुपये) मूल्य के आम खरीदे थे। इसमें से गुजरात की केसर किस्म का हिस्सा सबसे बड़ा था, जो 1.92 करोड़ रुपये का था। भारत के अलावा, थाईलैंड, मैक्सिको और ताइवान भी जापान को आम की आपूर्ति करते हैं। हालांकि, इस साल पाकिस्तान और वियतनाम भी जापानियों के लिए वैकल्पिक स्रोत के रूप में उभरे हैं। यह भारत के लिए बड़ा खतरा है।
प्रतिबंध
जापान ने पहले भी लगाया था भारतीय आमों पर प्रतिबंध
जापान ने साल 1986 में फल मक्खियों के प्रकोप की रिपोर्ट के कारण आम के आयात पर रोक लगा दी थी। यह प्रतिबंध अगले 20 वर्षों तक लागू रहा। हालांकि, जून 2006 में जापान ने पूर्व वैज्ञानिक और तकनीकी परीक्षणों के बाद प्रतिबंध हटा दिया था, जिसमें सामने आया था कि आमों से बीमारियों और कीटों के प्रवेश का कोई खतरा नहीं है। उस दौरान देश के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने इसमें अपनी अहम भूमिका निभाई थी।