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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली गोल्फ क्लब के कुछ हिस्सों को सील करने का क्यों दिया आदेश?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली गोल्फ क्लब के कुछ हिस्सों को सील करने का आदेश दिया है (तस्वीर: फाइल)

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली गोल्फ क्लब के कुछ हिस्सों को सील करने का क्यों दिया आदेश?

May 28, 2026
06:53 pm

क्या है खबर?

दिल्ली के जिमखाना क्लब विवाद ने भारत के अन्य ऐसे विशिष्ट क्लबों पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। ब्रिटिश काल के इस विशेष क्लब का भविष्य अनिश्चित है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली गोल्फ क्लब (DGC) परिसर में स्थित मुगल काल के 2 संरक्षित मकबरों के चारों ओर 100 मीटर का प्रतिबंधित क्षेत्र लागू करने का निर्देश दिया है। इससे सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले विशेष क्लबों पर बहस तेज हो गई है। आइए पूरा मामला जानते हैं।

आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने DGC को लेकर क्या दिया आदेश?

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को DGC के प्रवेश द्वार के बाहर स्थित लाल बंगला प्रथम और द्वितीय के मध्यकालीन स्मारकों के आसपास 100 मीटर का निषिद्ध क्षेत्र घोषित करने का आदेश दिया। कोर्ट ने उस क्षेत्र में सभी गतिविधियों को निलंबित करने और इमारतों को सील करने का भी आदेश दिया है। इसमें स्मारक से 3 मीटर दूर स्थित DGC की रसोई के कुछ हिस्से भी शामिल होंगे। इससे मामला चर्चा में आ गया है।

जानकारी

1779-80 में हुआ था लाल बंगला मकबरा परिसर का निर्माण

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित लाल बंगला मकबरा परिसर का निर्माण 1779-1780 में हुआ था। इसका संबंध मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय से है। अन्य संरचनाओं में सैयद आबिद का मकबरा, लोदी काल का बारह खंबा, मुगल काल के अन्य मकबरे आदि शामिल हैं।

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आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी दिए हैं आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने क्लब परिसर के भीतर स्थित 9 अन्य ऐतिहासिक स्थलों के 20 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार की गतिविधि करने के खिलाफ अलग से निर्देश दिए हैं, जो प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष (AMASR) अधिनियम के तहत संरक्षित नहीं हैं। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने अदालत के आयुक्तों द्वारा प्रस्तुत की गई मौके की सर्वेक्षण रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद यह आदेश पारित किया है।

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टिप्पणी

कोर्ट ने मामले में क्या की टिप्पणी?

कोर्ट ने कहा, "आयुक्तों की रिपोर्ट में से पता चलता है कि अधिकांश स्मारकों में संरक्षण का नामोनिशान भी नहीं है। वे जर्जर अवस्था में हैं और बुनियादी संरक्षण कार्य भी नहीं किया गया है।" क्लब के वकील कपिल सिब्बल ने कहा, "क्लब का निर्माण 1952 में हुआ था, जबकि AMASR अधिनियम 1958 का है। यह बहुत कठोर आदेश है। इससे कोई भी व्यक्ति DGC में प्रवेश नहीं कर पाएगा। हमारी प्रतिक्रिया देखे बिना यह आदेश पारित न किया जाए।"

रिपोर्ट

आयुक्तों ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा?

अदालत के आयुक्तों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया है कि लाल बंगला प्रथम और द्वितीय (1779-80 ई.) संरक्षित स्मारक उद्यान के रसोई घर क्षेत्र के बेहद करीब स्थित है। संरक्षित स्मारक से मात्र 3 मीटर दूर स्थित रसोईघर का पूरा हिस्सा तत्काल हटा दिया जाना चाहिए। रसोई क्षेत्र में गर्म पानी के बॉयलर, पक्की इमारत, ड्रम, भारी बॉयलर पंखे, एक चिमनी और पानी की टंकियां थीं। न्यायालय आयुक्तों ने 30 दिनों के भीतर कार्रवाई करने की सिफारिश की है।

प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट पर क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने रिपोर्ट पर कहा, "AMASR अधिनियम, 1958 की धारा 20A के तहत 100 मीटर का संरक्षित क्षेत्र होना अनिवार्य है। तत्काल प्रभाव से उक्त संरचना के 100 मीटर के दायरे में कोई भी गतिविधि निषिद्ध है। निर्मित किसी भी संरचना को तत्काल जब्त कर लिया जाएगा।" पीठ ने कहा, "नई दिल्ली नगर परिषद (NDNC) को तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया जाता है। हम NDNC अध्यक्ष और पुलिस आयुक्त को अनुपालन के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं।"

इतिहास

क्या है DGC का इतिहास?

179 एकड़ में फैला DGC डॉ जाकिर हुसैन रोड पर इंडिया गेट के पास स्थित है। जिस सरकारी भूमि पर यह क्लब स्थित है, उस पर तुगलक और लोधी काल के 9-10 स्मारक भी हैं। ब्रिटिश काल का यह क्लब 1930 के दशक की शुरुआत में नगरपालिका गोल्फ कोर्स के रूप में बना था और फरवरी 1950 में कॉर्पोरेट इकाई बन गया। इसके 5,400 स्थायी सदस्य हैं और इसमें 18-होल वाला लोधी कोर्स और 9-होल वाला पीकॉक कोर्स शामिल है।

सुविधाएं

DGC में क्या-क्या सुविधाएं हैं?

DGC में एक क्लब हाउस, रेस्तरां, बार, एक स्विमिंग पूल और निजी कार्यक्रम स्थल भी हैं। पिछले कई दशकों में DGC देश के शक्तिशाली नौकरशाही, राजनीतिक और व्यावसायिक अभिजात वर्ग के लिए एक नेटवर्किंग केंद्र के रूप में उभरा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इसके वर्तमान सदस्यों में सेवारत और सेवानिवृत्त सिविल सेवक, न्यायाधीश, राजनेता, सैन्य अधिकारी, राजनयिक और धनी व्यवसायी शामिल हैं। क्लब रिक्तियों के आधार पर हर साल केवल 60-70 स्थायी सदस्यों ही शामिल करता है।

विवाद

विवादों में उलझ चुका है DGC

DGC विवादों से अछूता नहीं है। 2017 में मेघालय की एक खासी महिला ने आरोप लगाया था कि उसे पारंपरिक जैन पोशाक पहनने के कारण अपमानित किया गया और क्लब छोड़ने को कहा गया था। इस पर काफी विवाद हुआ था। पिछले साल एशियाई टूर विजेता राशिद खान और दिल्ली स्थित कई पेशेवर गोल्फरों ने DGC में अभ्यास के अधिकार की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर धरने की धमकी दी थी। उन्होंने क्लब को सरकारी जमीन पर बताया था।

पट्टा

सरकार ने 2050 तक बढ़ाया DGC का पट्टा

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने 2025 में लोकसभा में बताया था कि केंद्र सरकार ने पिछले साल DGC का पट्टा 2050 तक बढ़ा दिया था, क्योंकि प्रतिष्ठित क्लब ने सुविधा को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंचाने का वादा किया था। 2036 से गोल्फ ओलंपिक का हिस्सा होगा। इधर, DGC के कप्तान विक्रम सेठी ने बताया कि जब दिल्ली पहले से ही घटते हरित आवरण से जूझ रही है, तो DGC को खत्म करना समझदारी भरा कदम नहीं होगा।

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