भारत के दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना के दूसरे चरण को मंजूरी देने से क्यों घबराया पाकिस्तान?
क्या है खबर?
भारत ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर स्थित दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी। भारत के पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख विशेषज्ञ पैनल द्वारा दिसंबर में इस परियोजना को मंजूरी देने बाद के भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव और बढ़ गया है। ऐसे में आइए जानते हैं भारत ने इस परियोजना को मंजूरी क्यों दी और पाकिस्तान क्यों इसका विरोध कर रहा है।
मंजूरी
भारत ने परियोजना को कब दी मंजूरी?
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन जलविद्युत परियोजनाओं पर विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने 19 दिसंबर, 2025 में अपनी 45वीं बैठक में 260 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-II जलविद्युत परियोजना को पर्यावरण संबंधी मंजूरी प्रदान दे दी थी। इस मंजूरी से परियोजना विकासकर्ता के लिए निर्माण संबंधी निविदाओं के साथ आगे बढ़ने का रास्ता खुल गया। इस परियोजना की अनुमानित लागत 3,200 करोड़ रुपये हैं, लेकिन कुछ दस्तावेजों में यह 3,277.45 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है।
जानकारी
निविदाएं जारी होने के बाद शुरू हो सकेगा काम
निविदाएं जारी होने और आवंटित होने के बाद परियोजना के दूसरे चरण का निर्माण कार्य जम्मू-कश्मीर के किश्तवार जिले में शुरू होने की उम्मीद है, जहां मौजूदा दुलहस्ती विद्युत स्टेशन पहले से ही चालू है। यह भारत के लिए अहम परियोजना है।
महत्व
दुलहस्ती परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?
दुलहस्ती चरण-II परियोजना को मौजूदा दुलहस्ती स्टेज-I जलविद्युत परियोजना के विस्तार के रूप में योजनाबद्ध किया गया है, जो 390 मेगावाट की रन-ऑफ-द-रिवर योजना है जिसे 2007 में चालू किया गया था और जिसका संचालन नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHPC) द्वारा किया जाता है। चरण-I प्रतिवर्ष 2,000 मिलियन यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन कर रहा है, जिससे जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली और चंडीगढ़ समेत कई राज्यों को बिजली आपूर्ति हो रही है।
लागत
लगातार बढ़ती गई दुलहस्ती परियोजना की लागत
दुलहस्ती परियोजना की मूल परिकल्पना 1985 में की गई थी और उसी वर्ष इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। इसके पूरा होने तक की यात्रा में बार-बार देरी हुई और लागत में लगातार वृद्धि होती रही। शुरुआत में इस परियोजना की अनुमानित लागत 1.6 अरब रुपये थी, लेकिन यह बढ़कर क्रमशः 4.5 अरब रुपये, 8 अरब रुपये, 11 अरब रुपये, 16 अरब रुपये और अंततः 7 अप्रैल, 2007 को इसके परिचालन में आने तक 24 अरब रुपये हो गई।
बांध
70 मीटर ऊंचा है दुलहस्ती परियोजना का बांध
दुलहस्ती परियोजना के लिए बनाया गया बांध 70 मीटर ऊंचा है और 186 मीटर लंबा है। यह प्रमुख शहरी केंद्रों से दूर बीहड़ हिमालयी इलाके में बनाया गया है। इस परियोजना के तहत चिनाब नदी के पानी को 9.5 किलोमीटर लंबी सुरंग के माध्यम से विद्युत स्टेशन तक मोड़ा जाता है और फिर उसे वापस नदी में छोड़ दिया जाता है। इसमें निचले स्तर के गेटेड स्पिलवे लगे हैं जो गाद को बहा ले जाने की अनुमति देते हैं।
विस्तार
दुलहस्ती चरण-II परियोजना कैसे आगे बढ़ेगी?
दुलहस्ती चरण-II को मौजूदा बुनियादी ढांचे का लाभ उठाने के लिए डिजाइन किया गया है। पूरी तरह से नया बांध बनाने के बजाय नया चरण 3,685 मीटर लंबी और 8.5 मीटर व्यास वाली एक अलग सुरंग के माध्यम से चरण-I बिजली स्टेशन से पानी लेगा। इस परियोजना में एक सर्ज शाफ्ट, एक प्रेशर शाफ्ट और एक भूमिगत विद्युत केंद्र शामिल है, जिसमें 130 मेगावाट की दो उत्पादन इकाइयां लगी हैं, जिससे दूसरे चरण की क्षमता 260 मेगावाट होगी।
जमीन
दुलहस्ती चरण-II के लिए कितनी जमीन अधिग्रहित की जाएगी?
विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति को प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए कुल भूमि की आवश्यकता 60.3 हेक्टेयर है। इसमें से लगभग 8.26 से 8.27 हेक्टेयर निजी भूमि दो गांवों बेनजवार और पालमार के निवासियों से अधिग्रहित की जाएगी। आधिकारिक दस्तावेजों से पता चलता है कि भूमि अधिग्रहण से लगभग 62 परिवार प्रभावित होंगे। इस परियोजना के लिए 22 अगस्त, 2025 को बंजवार गांव में एक जन सुनवाई आयोजित की गई थी, जहां भूमिगत विद्युत केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है।
प्राथमिकता
भारत किस तहर सिंधु बेसिन को दे रहा प्राथमिकता?
सिंधु जल संधि के तहत, पाकिस्तान ने सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के जल पर नियंत्रण बनाए रखा, जबकि भारत ने रावी, ब्यास और सतलुज नदियों पर अपने अधिकार बरकरार रखा। हालांकि, संधि ने भारत को पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत परियोजनाओं की मंजूरी दी, लेकिन इसने सख्त डिजाइन संबंधी प्रतिबंध और प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं भी लागू कीं। संधि के स्थगित होने के बाद भारत ने लंबे समय से लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए कदम उठाए हैं।
प्रतिक्रिया
दुलहस्ती चरण-II की मंजूरी पर पाकिस्तान ने क्या दी प्रतिक्रिया?
पाकिस्तान की पूर्व संघीय मंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) नेता शेरी रहमान ने भारत के इस कदम को चिनाब नदी के जल को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'दुल्हस्ती परियोजना को भारत की मंजूरी सिंधु जल संधि का स्पष्ट और गंभीर उल्लंघन है। एकतरफा कार्रवाई पाकिस्तान के मान्यता प्राप्त जल अधिकारों को सीधे तौर पर कमजोर करती है और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।'
आरोप
रहमान ने भारत पर ये भी लगाए हैं आरोप
रहमान ने लिखा है, 'सिंधु जल संधि के अवैध निलंबन के बादभारत ने सिंधु बेसिन में कई विवादित जलविद्युत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इन परियोजनाओं में सावलकोट, रैटल, बुरसर, पाकल दुल, क्वार, किरू और कीर्थाई-1 और 2 शामिल हैं। दुलहस्ती चरण-II को इस रणनीति का हिस्सा माना जाता है।' उन्होंने चेतावनी दी कि भारत का यह कदम न तो समझदारी भरा है और न ही स्वीकार्य है। इससे द्विपक्षीय संबंधों में तनाव और बढ़ेगा।'