नोएडा में निजी कंपनियों के हजारों कर्मचारी क्यों कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन, क्या हैं मांगें?
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश के नोएडा में फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स में निजी कर्मचारी वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए, जो लंबे समय से लंबित मांग रही है। कुछ प्रदर्शनों ने हिंसा का रूप ले लिया और कुछ इलाकों में गाड़ियों में आगजनी और पथराव की खबरें सामने आईं। प्रदर्शनों के कारण दिल्ली की ओर जाने वाली सड़कों पर यातायात जाम हो गया और हजारों यात्री फंस गए। आइए श्रमिकों के प्रदर्शन का कारण और मांगें जानते हैं।
प्रदर्शन
कैसे हिंसक हुआ निजी कर्मचारियों का प्रदर्शन?
नोएडा में कई कंपनियों के कर्मचारी वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को कर्मचारी सड़क पर उतर आई। सेक्टर 84 स्थित मदरसन कंपनी के सामने श्रमिकों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया और जमकर उत्पात मचाते हुए एक वाहन में आग लगा दी। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर हुए स्थिति को नियंत्रण में किया। अशांति के कारण दिल्ली जाने वाले प्रमुख मार्गों पर यातायात बाधित हो गया।
प्रतिक्रिया
हिंसा के बाद सरकार और पुलिस की कैसी रही प्रतिक्रिया?
अधिकारियों ने अशांति को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कार्रवाई करते हुए औद्योगिक क्षेत्रों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया। अधिकारी निजी कर्मचारियों से मामले में शांति बनाए रखने की और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील कर रहे हैं। इसी तरह कर्मचारियों को ओवरटाइम के लिए दोगुना भुगतान, साप्ताहिक वेतन भुगतान, निर्धारित समय सीमा से पहले अनिवार्य बोनस भुगतान और शिकायत निवारण के साथ उत्पीड़न विरोधी समितियों के गठन की रूपरेखा तैयार की है।
कारण
क्यो प्रदर्शन कर रहे हैं कर्मचारी?
विरोध प्रदर्शन को पड़ोसी राज्य हरियाणा में हाल ही में हुई 35 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी ने और हवा दी है। हाल ही में हरियाणा सरकार ने अकुशल से लेकर उच्च कुशल तक सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की है। हरियाणा में अब अकुशल कर्मचारियों को न्यूनतम 15,220 रुपये प्रति माह, अर्ध-कुशल कर्मचारियों को 16,780 रुपये और कुशल कर्मचारियों को 19,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे। इसके बाद नोएडा में भी वेतन बढ़ोतरी की मांग शुरू हो गई।
हालात
कर्मचारियों ने बताए मौजूदा हालात
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि 8 घंटे के काम के लिए उन्हें कम से कम 20,000 रुपये वेतन मिलना चाहिए, लेकिन कंपनियां सिर्फ 200-300 रुपये की मामूली वेतन वृद्धि देती हैं। मंजू देवी नाम की महिला ने कहा, "मैं 13,000 रुपये महीना कमाती हूं और 12 घंटे काम करती हूं। इतने में 4 बच्चों का खर्च कैसे चलाऊं?" एक अन्य महिला ने कहा, "गैस और किराया लगातार बढ़ रहा है, लेकिन हमारा वेतन नहीं बढ़ रहा है।"
परेशानी
मुश्किल हालात में काम कर रहे कर्मचारी
18 वर्षीय सुरेंद्र कश्यप ने बताया कि वह 13,000 रुपये कमाते हैं, जिसमें से 4,000 रुपये किराए में चला जाता है। उन्होंने कहा, "हमें एक घंटे में 70 पीस का टारगेट दिया जाता है, पूरा न करने पर अपमानित करते है। सालों से सिर्फ 320 रुपये की बढ़ोतरी मिली है और बीमार होने पर भी दबाव डाला जाता है।" एक अन्य कर्मचारी राहुल ने बताया कि वह 13,500 रुपये कमाते हैं और पिछले साल उनका वेतन केवल 39 रुपये बढ़ा।
मांग
क्या है कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शन में शामिल निजी कर्मचारी वेतन वृद्धि के साथ कई तरह के सुधारों की मांग कर रहे हैं। उनकी मांगों में न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये प्रति माह करने, ओवरटाइम वेतन और बोनस भुगतान देने, साप्ताहिक अवकाश और समय पर वेतन भुगतान करने, कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्य परिस्थितियां, विशेषकर महिलाओं के लिए, शिकायत निवारण प्रणालियों और यौन उत्पीड़न विरोधी समितियों की स्थापना करने और कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी का दूर करना शामिल हैं।
उम्मीद
अब आगे क्या है उम्मीद?
अधिकारियों का कहना है कि श्रमिकों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के माध्यम से स्थिति को स्थिर करने के प्रयास जारी हैं। कर्मचारियों की उचित मांगों को पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि कंपनी की पॉलिसी का भी अध्ययन किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस सप्ताह कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करा दिया जाएगा। इस बीच, स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।