कश्मीर के लोग ईरान के समर्थन में क्यों कर रहे सोना, नकदी और बर्तनों का दान?
क्या है खबर?
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का सोमवार को 24वां दिन हैं। दुनियाभर के देशों ने इस संघर्ष की निंदा की है। कई देशों ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की आलोचना की है, जिसमें कई ऊर्जा स्थलों को निशाना बनाया गया है। हालांकि, इस संघर्ष से हजारों किलोमीटर दूर भारत के कश्मीर के लोगों ने सोना, नकदी और तांबे के बर्तन दान कर ईरान को समर्थन दिया है। आइए इसके पीछे का कारण जानते हैं।
अभियान
कश्मीर में ईरान के लिए चलाया गया दान अभियान
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त रूप से ईरान पर हमला करने के बाद से पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है। इस बीच कश्मीर भर में कई मुसलमान ईरान को अपना समर्थन जताने के प्रयास में सोना, नकदी और तांबा जैसी मूल्यवान वस्तुएं दान कर रहे हैं। ईद के जश्न के एक दिन बाद कश्मीर घाटी के युवाओं ने ईरान में चल रहे संघर्ष से प्रभावित लोगों की मदद के लिए घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा किया।
मदद
लोगों ने बढ़-चढ़कर लिया दान में हिस्सा
अधिकारियों ने PTI को बताया कि ईरान की मदद के लिए चलाए गए अभियान में मुस्लिम समुदाय ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। महिलाओं ने उदारतापूर्वक दान दिया, जिसमें सोने के गहने, तांबे के बर्तन और अन्य मूल्यवान घरेलू सामान शामिल थे। कुछ परिवारों ने पशुधन तक दान किए हैं। रैनावारी निवासी एजाज अहमद ने कहा, "ईरान पर थोपे गए अवैध युद्ध से भारी तबाही हुई है। सभ्य दुनिया इतना तो कर ही सकती है कि सहायता भेजे।"
समर्थन
कश्मीरी महिला ने दान किया दशकों से जमा किया गया सोना
एक कश्मीरी महिला ने 3 दशकों से संरक्षित सोना दान कर दिया। यह उनके पति की स्मृति था, जिनका 28 साल पहले निधन हो गया था। कश्मीर के गांदरबल निवासी युवक ने अपनी रॉयल एनफील्ड बाइक को बिक्री के लिए रखा और उससे प्राप्त धनराशि को ईरान राहत कार्यों के लिए दान कर दिया। इसी प्रकार, एक व्यक्ति ने ईरान के लिए धन जुटाने के लिए अपनी कार बेच दी, जबकि एक महिला ने रसोई के इलेक्ट्रॉनिक सामान बेच दिए।
शांति
"गहने दान करने से मिली आंतरिक शांति"
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्यकर्ता, स्वयंसेवक, मस्जिदों और इमामबाड़ों के प्रबंधक घर-घर जाकर चंदा इकट्ठा कर रहे हैं। मागम निवासी नौशीन जहरा ने डेक्कन क्रॉनिकल से कहा, "डेढ़ साल पहले मेरी शादी के समय मेरे ससुराल वालों द्वारा दिए गए सोने-चांदी के गहने और मेरे पिता द्वारा तैयार किए गए गहने दान करने से मुझे आंतरिक शांति मिली है।" अंजुमन-ए-शरी शियान के आगा मुजतबा ने कहा, "यह ईरान के साथ एकजुटता व्यक्त करने की मानवीय पहल है।"
आभार
ईरान ने दान के लिए जताया आभार
कश्मीर के लोगों की ओर से दिए गए इस दान को लेकर ईरान ने भी उनका दिल से आभार जताया है। भारत के नई दिल्ली स्थित ईरान के दूतावास ने एक्स पर लिखा, 'कृतज्ञता से भरे हृदय से, हम कश्मीर के दयालु लोगों को मानवीय सहायता और हार्दिक एकजुटता के माध्यम से ईरान के लोगों के साथ खड़े रहने के लिए तहे दिल से धन्यवाद देते हैं। इस दयालुता को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। धन्यवाद, भारत।'
ट्विटर पोस्ट
यहां देखें पोस्ट
We will never forget your kindness and humanity.
— Iran in India (@Iran_in_India) March 22, 2026
Thank you, India. https://t.co/hiYnIEfN3D
समर्थन
कश्मीरियों का ईरान को समर्थन
कश्मीरियों द्वारा दिया गया दान ईरान के प्रति उनके समर्थन का एक और उदाहरण है। इससे पहले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर पर जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। उसके चलते अधिकारियों ने 2 दिनों के लिए स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए और कई प्रमुख सड़कों पर बैरिकेड लगाकर सार्वजनिक आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस दौरान कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों के साथ झड़प भी हुई थी।
कारण
क्या है कश्मीरियों के ईरान का समर्थन करने का कारण?
ईरानी शासन के प्रति इस प्रबल समर्थन का कारण कश्मीरियों में कई शिया मुसलमान होना हैं। उनके लिए सर्वोच्च नेता केवल एक राजनीतिक नेता नहीं हैं। वे शिया मुसलमानों के धार्मिक पदानुक्रम में सबसे वरिष्ठ व्यक्तियों में से एक थे। उनके फरमानों और निर्देशों ने दुनिया भर में लाखों लोगों की आस्था को आकार दिया। इसके अलावा, ईरानी क्रांति के एक साल बाद खामेनेई ने कश्मीर का दौरा कर नमाजियों को संबोधित करते हुए शिया-सुन्नी एकता का संदेश दिया था।