सरकार की सलाह के बाद भी ईरान छोड़ने से क्यों हिचकिचा रहे भारतीय मेडिकल छात्र?
क्या है खबर?
अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान में मौजूद भारतीय मेडिकल छात्रों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार ने अमेरिकी हमले की संभावना के मद्देनजर छात्रों सहित भारतीय नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह जारी की है। हालांकि, इसके बाद भी कई छात्रों के लिए ईरान छोड़ना आसान विकल्प नहीं है क्योंकि उनकी MBBS की परीक्षाएं जल्द शुरू होने वाली हैं। ऐसे में वह जिंदगी और करियर के असमंजस में फंस गए हैं।
परीक्षा
विश्वविद्यालयों ने स्थगित नहीं की परीक्षाएं
ईरान के विभिन्न विश्वविद्यालयों में मेडिकल कार्यक्रमों में दाखिला लेने वाले इन छात्रों में से बड़ी संख्या में जम्मू-कश्मीर के हैं। उनका तर्क है कि ईरान छोड़ना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है, लेकिन महत्वपूर्ण परीक्षाओं में शामिल न हो पाने से उनकी स्नातक की डिग्री में देरी हो सकती है और उनकी डिग्री की पेशेवर मान्यता खतरे में पड़ सकती है। छात्रों का कहना है कि इन हालातों में भी विश्वविद्यालयों ने परीक्षाएं स्थगित नहीं की हैं।
परीक्षा
कब से शुरू होंगी परीक्षाएं?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली में अनिवार्य सरकारी मूल्यांकन परीक्षाएं, बेसिक साइंस और पूर्व इंटर्नशिप परीक्षाएं 5 मार्च से शुरू होने वाली हैं। इन परीक्षाओं के परिणामों से ही तय होता है कि छात्र प्री-क्लिनिकल अध्ययन से क्लिनिकल प्रशिक्षण और अस्पताल में नियुक्ति के लिए पात्र हैं या नहीं। ऐसे में ईरान में पढ़ने वाले भारतीय मेडिकल छात्र भारत सरकार के ईरान छोड़ने की सलाह जारी करने के बाद भी असमंजस में फंसे हैं।
अपील
भारतीय छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी से की हस्तक्षेप की अपील
ईरान में ये परीक्षाएं हर साल दो बार होती हैं। ऐसे में भारतीय छात्रों के ये परीक्षाएं छोड़ने से उनकी शैक्षणिक प्रगति में 6 महीने तक का नुकसान हो सकता है और उनकी साढ़े 5 साल की मेडिकल डिग्री पूरी करने में काफी देरी हो सकती है। अब भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी की गई सलाह के बीच भारतीय छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। सभी छात्र बेहद चिंतित हैं।
बयान
भारतीय छात्रों ने क्या दिया बयान?
ईरान में पढ़ रहे भारतीय मेडिकल छात्र बिलाल भट ने ANI से कहा, "हमारी परीक्षाएं 5 और 28 मार्च को हैं। भारतीय दूतावास ने तुरंत देश छोड़ने को कहा है, लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि यह हमारी सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा है। हम देश छोड़ना चाहते हैं, लेकिन हमारी परीक्षाएं हैं। हमारे लिए देश छोड़ना संभव नहीं है।" गत दिनों भारत लौटे छात्र फैजान नबी ने ईरान में भारतीयों की सुरक्षा खतरे में होने की बात कही है।
मांग
भारतीय छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी से क्या की मांग?
भारतीय छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी से ईरानी अधिकारियों से परीक्षा स्थगित करने या वैकल्पिक व्यवस्था करने पर विचार करने के लिए बातचीत करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि अगर विश्वविद्यालय परीक्षाएं स्थगित कर देता है तो उन्हें बिना किसी शैक्षणिक नुकसान के अस्थायी रूप से देश छोड़ने की अनुमति मिल जाएगी। ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) की जम्मू-कश्मीर इकाई ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
आंकड़ा
ईरान में कितने भारतीय छात्र हैं?
लोकसभा और राज्यसभा के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में लगभग 2,000 भारतीय छात्रों ने उच्च शिक्षा के लिए ईरान को चुना। इनमें से 1,000 से 1,500 भारतीय छात्र चिकित्सा शिक्षा के लिए ईरान गए। विदेश मंत्रालय के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 2,050 भारतीय छात्र ईरान में नामांकित थे, जिनमें से अधिकांश तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, शाहिद बेहेश्टी यूनिवर्सिटी और इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। इनमें से कई छात्र कश्मीर से थे।
हालात
ईरान में वर्तमान स्थिति क्या है?
हालात तनावपूर्ण हैं, क्योंकि देश में एक बार फिर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। 24 फरवरी को ईरानी अधिकारियों ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ लगातार चौथे दिन चल रहे छात्र प्रदर्शनों को दबाने के लिए कई ईरानी विश्वविद्यालयों में सादे कपड़ों में पुलिस और सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। तेहरान के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सहित कई परिसरों में छात्रों और राज्य समर्थित अर्धसैनिक समूह बासिज मिलिशिया के बीच झड़पों की खबरें सामने आई हैं।
हमला
क्या ईरान पर हमला करने की तैयारी में है अमेरिका?
ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा संभावित सैन्य अभियान की अटकलें चरम पर हैं। मंगलवार को अपने स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे ईरान के साथ संकट का कूटनीतिक समाधान पसंद करते हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ संभावित युद्ध की संभावना भी जताई। उनकी ये टिप्पणियां पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य शक्ति में वृद्धि के बीच आई हैं। ऐसे में हमले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।