किसान संगठन भारत के हस्ताक्षर किए बिना ही क्यों कर रहे व्यापार समझौते का विरोध?
क्या है खबर?
पंजाब, हरियाणा और कई अन्य राज्यों के किसान प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में दिल्ली स्थित किसान घाट पर महापंचायत के लिए दिल्ली जा रहे हैं। इसको देखते हुए हरियाणा पुलिस ने प्रमुख सीमा चौकियों पर सुरक्षा बढ़ाकर बैरिकेडिंग लगा दी। इसी तरह खानाउरी और बस्तारा में किसानों रोक लिया। खास बात यह है कि भारत और अमेरिका ने इस समझौते पर अभी हस्ताक्षर भी नहीं किए है। ऐसे में जानते हैं आखिर किसान विरोध क्यों कर रहे हैं।
समर्थन
किन राज्यों से दिल्ली कूच कर रहे किसान?
इस किसान महापंचायत के लिए पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, केरलम और तमिलनाडु समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की ओर कूच कर रहे हैं।
देश भर के 500 से अधिक किसान संगठन और सामाजिक संगठनों ने मिलकर इस भारत-अमेरिका के प्रस्तावित समझौते के खिलाफ 'देश बचाओ मोर्चा' का गठन भी किया है।
किसानों ने सरकार से इस व्यापार समझौते को पूरी तरह से रद्द करने की मांग की है।
तैयारी
पुलिस ने महापंचायत को लेकर क्या की तैयारी?
किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने पंजाब और हरियाणा को जोड़ने वाले प्रसिद्ध शंभू बॉर्डर की पूरी तरह किलेबंदी कर दी है।
भारी सुरक्षा बल तैनात किया है। सीमेंट के बड़े-बड़े ब्लॉक्स और कटीले तार लगाकर रास्तों को बंद कर दिया।
इसी तरह किसान नेताओं की धरपकड़ की जा रही है। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी और BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश बैंस को हिरासत में ले लिया।
सवाल
बिना हस्ताक्षर के विरोध क्यों कर रहे किसान?
किसान संगठनों का तर्क है कि अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पादों के आयात की अनुमति से भारतीय किसानों, कृषि मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
उन्हें आशंका है कि अत्यधिक सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में भर सकते हैं, जिससे घरेलू फसलों की कीमतें गिर सकती हैं।
उनकी चिंता है कि भारतीय किसानों को अमेरिका की तुलना में सरकार से बहुत कम सहायता मिलती है। ऐसे समझौते के बाद वे प्रतिस्पर्धा करने में संघर्ष करेंगे।
आशंका
किसानों को यह भी है आशंका
किसान संगठनों के अनुसार, प्रस्तावित समझौता कुछ कृषि उत्पादों से आगे बढ़कर अंततः डेयरी, उद्योग, डिजिटल व्यापार, ई-कॉमर्स, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार और सेवाओं को भी शामिल कर सकता है।
पिछले कुछ महीनों से इस समझौते का विरोध बढ़ता जा रहा है। पंजाब में किसान समूहों ने मोटरसाइकिल रैलियां आयोजित की हैं, जबकि पिछले महीने देशभर में हजारों किसानों ने प्रस्तावित व्यापार समझौते की प्रतीकात्मक प्रतियां जलाकर विरोध जताया था।
हालांकि, सरकार उन्हें समझाने का प्रयास कर रही है।
फसल
समझौते से किन फसलों को हो सकता है सर्वाधिक नुकसान?
समझौते के तहत अमेरिका से सोयाबीन तेल और पशु चारा (DDGS) के आयात को आसान बनाया जाएगा। इससे भारत के घरेलू सोयाबीन और मक्का उत्पादक किसानों को मिलने वाले दाम टूट जाएंगे।
इसी तरह कपास से आयात शुल्क हटने पर गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा के कपास किसानों को भारी नुकसान होगा।
वाशिंगटन से आने वाले सस्ते सेबों के कारण कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों के बाजार पर बुरा असर पड़ने की आशंका रहेगी।
खतरा
MSP व्यवस्था के खतरे में पड़ने की संभावना
भारतीय किसान दुग्ध उत्पादन को अपनी आय का मुख्य जरिया मानते हैं। अमेरिकी डेयरी उत्पादों (दूध पाउडर, चीज आदि) के भारतीय बाजार में प्रवेश से ग्रामीण डेयरी उद्योग पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
इसी तरह किसानों का मानना है कि व्यापार समझौतों के वैश्विक नियमों के कारण सरकार पर समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की सरकारी खरीद को सीमित करने या खत्म करने का दबाव बढ़ेगा।
इससे भारतीय खाद्य सुरक्षा का ढांचा कमजोर हो सकता है।
समझौता
आखिरी अब तक क्यों नहीं हुआ व्यापार समझौता?
महीनों की बातचीत के बावजूद भारत और अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को भी अंतिम रूप नहीं दे पाए हैं।
रायटर्स के अनुसार, वार्ता का नवीनतम दौर बिना किसी सहमति के समाप्त हो गया क्योंकि अमेरिका ने भारत की कुछ प्रमुख मांगों पर आश्वासन नहीं दिया। इन मांगों में समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद नए टैरिफ न लगाने की गारंटी शामिल है।
इसी तरह भारत ने भी बातचीत के दौरान कृषि मुद्दे पर समझौता करने से इनकार कर दिया है।
रुख
समझौते पर क्या है सरकार का रुख?
समझौता वार्ता से परिचित एक भारतीय अधिकारी ने रॉयटर्स से कहा, "हमारा रुख स्पष्ट है, हम ऐसे किसी समझौते में जल्दबाजी नहीं करेंगे जो अनुकूल शर्तों पर आधारित न हो या कृषि क्षेत्र में कुछ मुद्दों पर समझौता करने का इरादा न रखते हों।"
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी दोहराया है कि भारत संतुलित और दोनों देशों के लिए लाभकारी समझौते पर ही हस्ताक्षर करेगा। इसमें भारत के संवेदनशील कृषि उत्पादों की पूरी तरह से रक्षा की जाएगी।