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प्रधानमंत्री मोदी ने किन्हें कहा 'दिमागी नक्सल'? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने किया स्पष्ट
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किन्हें दिमागी नक्सल कहा है

प्रधानमंत्री मोदी ने किन्हें कहा 'दिमागी नक्सल'? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने किया स्पष्ट

Aug 16, 2026
04:30 pm

क्या है खबर?

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले की प्राचीर से दिए गए 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर देश में सियासी घमासान मचा हुआ है। विपक्ष के चौतरफा हमलों के बीच अब सरकार की तरफ से इस पर आधिकारिक सफाई और स्पष्टीकरण आया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार (16 अगस्त) को सोशल मीडिया पर सिलसिलेवार पोस्ट कर इस शब्द की आधिकारिक परिभाषा देश के सामने रखी है।

स्पष्टीकरण

सरकार ने मामले पर क्या दिया स्पष्टीकरण?

रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने किन्हें दिमागी नक्सल कहा है।

उन्हाेंने एक्स पर लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी नेताओं को दिमागी नक्सल नहीं कहा है। उन्होंने केवल उन लोगों को दिमागी नक्सली कहा है, जो माओवाद का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते, अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं और धारा 370 का समर्थन करते और वह लोग जो 'चिकन नेक' को काटकर पूर्वोत्तर के राज्यों को भारत से अलग करना चाहते हैं।'

बयान

प्रधानमंत्री मोदी ने क्या दिया था बयान?

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा था, "हथियारी नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल... ये दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। हिंसा, अराजकता के वो रास्ते खोज रहे हैं... समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए भांति-भांति के दांव कर रहे हैं। इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा, इन दिमागी नक्सलियों को आइसोलेट (अलग-थलग) करना होगा और राष्ट्र को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।"

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आलोचना

प्रधानमंत्री मोदी के बयान की विपक्ष कर रहा तीखी आलोचना

प्रधानमंत्री मोदी के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर मुख्य विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने इसे 'हताशा का प्रतीक' करार दिया है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने एक्स पर लिखा, 'मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है! अगर, सरकार की गलत नीतियों का शांतिपूर्ण विरोध करना, मानवाधिकारों की बात करना और सच बोलना सरकार की नजर में 'दिमागी नक्सल' होना है, तो उन्हें यह स्वीकार है।'

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अन्य

इन नेताओं ने भी की आलोचना

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, "यह प्रधानमंत्री का पुराना तरीका है। वे पहले लोगों को 'अर्बन नक्सल' या 'दिमागी नक्सल' कहकर गाली देते हैं और फिर उन्हीं की मांगों को स्वीकार कर लेते हैं।"

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा, "मोदी किनको दिमागी नक्सल कह रहे हैं? क्या हमारे उन युवाओं को, जो जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे? या बेहतर और सुचारू शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे छात्रों को?"

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