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मद्रास हाई कोर्ट का फैसला, कहा- नाबालिग पर सीटी मारना और हाथ खींचना यौन हमला नहीं
मद्रास हाई कोर्ट ने यौन हमले के मामले में चौंकाने वाला फैसला सुनाया है

मद्रास हाई कोर्ट का फैसला, कहा- नाबालिग पर सीटी मारना और हाथ खींचना यौन हमला नहीं

Aug 02, 2026
03:33 pm

क्या है खबर?

मद्रास हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि किसी नाबालिग लड़की द्वारा सीटी बजाने को नजरअंदाज करने के बाद जबरन उसका हाथ खींचना यौन उत्पीड़न के दायरे में आता है। उसे यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत यौन हमला नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने यह फैसला मार्च 2020 की एक घटना के लिए विशेष POCSO अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए मंदाई उर्फ ​​मनोगरन की अपील पर सुनवाई के दौरान दिया।

प्रकरण

क्या है यौन हमले का पूरा मामला?

यह घटना 1 मार्च, 2020 को घटी, जब मनोगरन ने अपनी बालकनी से नाबालिग लड़की पर सीटी बजाई, जब वह अपनी चाची के घर जा रही थी।

जब उसने उसे नजरअंदाज किया, तो आरोपी ने नीचे आकर उसका हाथ पकड़कर खींच लिया और उसकी ओर मुस्कुराया, जिसे यौन इरादे के रूप में समझा गया।

लड़की ने वहां से भागकर अपनी मां को घटना के बारे में बताया। उसके बाद 2 मार्च को मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी।

दलील

बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?

मामले में विशेष POCSO अदालत ने 6 जून को मनोगरन को 3 साल के कठोर कारावास और 1,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुना दी।

हालांकि, अपील की कार्यवाही के दौरान हाई कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या ये आरोप POCSO अधिनियम की धारा 8 के तहत यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आते हैं।

बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि बलपूर्वक हाथ खींचना अस्वीकार्य है, लेकिन यह यौन हमला नहीं था। यह धारा 11 के तहत इसे यौन उत्पीड़न है।

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फैसला

हाई कोर्ट ने फैसले की समीक्षा लंबित रहने तक जेल की सजा निलंबित की

अभियोजन पक्ष ने यह दावा किया कि लड़की का बयान पुलिस, मजिस्ट्रेट और ट्रायल कोर्ट में दिए गए उसके सभी बयानों में सुसंगत था।

हालांकि, हाई कोर्ट ने पाया कि इन कार्रवाइयों में केवल सीटी बजाना, उसे पुकारना और उसका हाथ पकड़ना शामिल था।

कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि इन कार्रवाइयों से ऐसे वास्तविक प्रश्न उठते हैं जिनकी आगे जांच की आवश्यकता है।

ऐसे में फैसले की समीक्षा लंबित रहने तक सजा और जुर्माना निलंबित रहेगा।

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