भारत और न्यूजीलैंड के बीच FTA होने से दोनों देशों को क्या होगा फायदा?
क्या है खबर?
भारत और न्यूजीलैंड सोमवार (27 अप्रैल) को नई दिल्ली के भारत मंडपम में अपने बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन द्वारा पहले की गई घोषणा के बाद केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस अहम समझौते से दोनों देशों को क्या-क्या फायदे होने की उम्मीद है।
समझौता
भारत और न्यूजीलैंड के बीच केवल 9 महीने में पूरा हुआ समझौता
यह समझौता असाधारण रूप से बहुत तेज गति से आगे बढ़ा है। दोनों देशों ने 16 मार्च, 2025 समझौते पर बातचीत शुरू की थी और 22 दिसंबर, 2025 को इसे पूरा भी कर लिया गया। यह भारत के सबसे तेजी से हुए व्यापार समझौतों में से एक बन गया है जो हस्ताक्षर के चरण तक पहुंचा है। अब इस समझौते को लागू होने से पहले दोनों देशों में इसकी पुष्टि की आवश्यकता होगी, जो संभवतः 2026 के अंत में होगी।
फायदा
भारत के 8,284 निर्यात उत्पादों को मिली 100 प्रतिशत शुल्क मुक्त पहुंच
इस समझौते से भारत के सभी 8,284 निर्यात उत्पादों को पहले दिन से ही न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क मुक्त प्रवेश मिलेगा। इससे पहले भारतीय वस्तुओं पर औसतन 2.2 प्रतिशत का निर्यात शुल्क लगता था, जबकि वस्त्र, चीनी मिट्टी के बर्तन और ऑटोमोबाइल जैसी कुछ श्रेणियों पर 10 प्रतिशत तक का शुल्क था। इस समझौते से वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मसाले, कॉफी और अनाज जैसे कृषि उत्पादों को बड़ा फायदा होगा।
अन्य
दवा और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र को भी मिलेगा फायदा
यह समझौता भारत के दवा और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र के लिए नियामक प्रक्रियाओं को भी सरल बनाता है। न्यूजीलैंड, अमेरिकी FDA और यूरोपीय औषधि एजेंसी जैसे वैश्विक नियामकों से निरीक्षण रिपोर्ट स्वीकार करेगा, जिससे अनुपालन लागत कम होगी और बाजार में प्रवेश की प्रक्रिया तेज होगी। न्यूजीलैंड के लिए अपनी तरह के पहले कदम के रूप में इस समझौते में माओरी स्वास्थ्य प्रथाओं के साथ आयुर्वेद की भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को भी मान्यता मिलेगी।
न्यूजीलैंड
न्यूजीलैंड के लिए बाजार पहुंच और अवसर
भारत ने न्यूजीलैंड से होने वाले द्विपक्षीय आयात के 95 प्रतिशत हिस्से को कवर करते हुए अपनी 70.03 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर टैरिफ छूट की पेशकश की है। इससे ऊन, शराब, लकड़ी, कोयला और एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे ताजे फल और सब्जियों जैसे प्रमुख निर्यातों को लाभ मिलने की उम्मीद है। समझौते में बागवानी, वानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन में सहयोग की रूपरेखा शामिल है। भारतीय किसानों को कीवी, सेब और शहद उत्पादन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता मिलेगी।
जानकारी
संवेदनशील क्षेत्र को संरक्षित रखा जाएगा
घरेलू हितों की रक्षा के लिए भारत ने अपनी 29.97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों (आयात मूल्य का लगभग 5 प्रतिशत) को समझौते से बाहर रखा है। इनमें डेयरी उत्पाद, प्याज और दालों जैसी प्रमुख कृषि वस्तुएं, खाद्य तेल, चीनी और रक्षा संबंधी वस्तुएं शामिल हैं।
वीजा
भारतीय पेशेवरों के लिए वीजा कार्यक्रम शुरू करेगा न्यूजीलैंड
इस FTA के तहत न्यूजीलैंड ने एक अस्थायी वीजा कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय पेशेवरों के लिए रास्ता खोला है। 3 वर्षों के लिए प्रतिवर्ष लगभग 1,667 वीजा जारी किए जाएंगे, जिसमें किसी भी समय अधिकतम 5,000 श्रमिकों की सीमा होगी। न्यूजीलैंड ने अगले 15 सालों में भारत में 20 अरब डॉलर (करीब 1.86 लाख करोड़ रुपये) के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई है। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और प्रौद्योगिकी शामिल है।
व्यापार
व्यापार लक्ष्य और रणनीतिक महत्व
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में लगभग 1.3 अरब डॉलर (करीब 12,000 करोड़ रुपये) का है और समझौते के लागू होने के 5 वर्षों के भीतर इसे बढ़ाकर 5 अरब डॉलर (करीब 46,500 करोड़ रुपये) करने का लक्ष्य है। यह FTA भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उच्च आय वाले प्रशांत बाजार तक पहुंच प्रदान करता है और साथ ही व्यापक ओशिनिया क्षेत्र के लिए प्रवेश द्वार का काम करता है।
सफलता
भारत को FTA के मार्ग में मिली एक और बड़ी सफलता
भारत-न्यूजीलैंड समझौता भारत द्वारा हाल ही में हस्ताक्षरित व्यापार समझौतों की श्रृंखला में एक और कड़ी जोड़ता है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम (UK) और EFTA ब्लॉक के साथ-साथ यूरोपीय संघ (EU) के साथ चल रहे समझौते शामिल हैं। शुल्क के अलावा, यह समझौता सेवाओं, डिजिटल सहयोग, कौशल गतिशीलता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को शामिल करते हुए व्यापक अगली पीढ़ी के FTA ढांचे को दर्शाता है। पुष्टि के बाद दोनों पक्षों के व्यवसायों को विस्तारित बाजार पहुंच मिलेगी।