क्या है उत्तर प्रदेश की MYUVA योजना और यह स्वरोजगार पैदा करने में कितनी सफल रही?
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश में रोजगार मांगने वाले युवाओं को 'रोजगार देने वाला' बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (MYUVA) योजना वर्तमान में युवाओं के लिए सबसे बड़ा संबल बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की यह फ्लैगशिप योजना न केवल राज्य से पलायन रोक रही है, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छोटे उद्योगों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर रही है। आइए जानते हैं यह योजना क्या और यह कितनी सफल रही है।
योजना
क्या है MYUVA योजना?
MYUVA उत्तर प्रदेश सरकार की एक प्रमुख फ्लैगशिप योजना है और इसे साल 2024 में शुरू किया गया था।
इसके तहत राज्य के शिक्षित और कुशल युवाओं को अपना नया उद्योग या सेवा व्यवसाय शुरू करने के लिए 5 लाख तक का ब्याज-मुक्त और गारंटी-मुक्त ऋण प्रदान किया जाता है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को रोजगार ढूंढने वाले के बजाय रोजगार पैदा करने वाला बनाना है, ताकि राज्य का तेजी से विकास हो सके।
पात्रता
क्या है योजना के लिए पात्रता?
योजना के लाभ के लिए आवेदक का उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना जरूरी है। उसकी उम्र 21 से 40 वर्ष और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 8वीं उत्तीर्ण अनिवार्य है। इंटरमीडिएट या समकक्ष को प्राथमिकता दी जाती है।
आवेदक के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान द्वारा जारी कौशल प्रमाण पत्र होना आवश्यक है या फिर उसका उत्तर प्रदेश सरकार की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, एक जिला एक उत्पाद प्रशिक्षण, टूलकिट योजना और अन्य के तहत प्रशिक्षित होना जरूरी है।
जानकारी
कैसे करें आवेदन?
आवेदकों को सबसे पहले MYUVA की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीयन कराना होगा। इसके बाद योजना के तहत मांगे गए शैक्षणिक प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और परियोजना प्रस्ताव सहित आवश्यक दस्तावेज जमा कराकर आवेदन पूरा करना होगा।
प्रक्रिया
आवेदन से पहले आवेदकों के लिए आवश्यक कार्य
सबसे पहले आवेदक को यह तय करना होता है कि वह किस क्षेत्र में व्यवसाय शुरू करना चाहता है।
इनमें खाद्य प्रसंस्करण, रेडीमेड कपड़े बनाना, फर्नीचर निर्माण जैसे विनिर्माण, मोबाइल/कंप्यूटर रिपेयरिंग शॉप, ब्यूटी पार्लर, पैथोलॉजी लैब, ऑटोमोबाइल गैराज और कोचिंग सेंटर जैसे सेवा क्षेत्र शामिल हैं।
उसके बाद आवेदक को अपने व्यवसाय की प्रोजेक्ट रिपोर्ट (दुकान किराया, मशीनरी, कच्चा माल) तैयार करनी होती है। इसमें व्यवसाय की कुल लागत (प्रथम चरण पर 5 लाख रुपये तक) का ब्योरा होता है।
सत्यापन
कैसे होता है आवेदन और दस्तावेजों का सत्यापन?
आवेदन करने के बाद जिला उद्योग केंद्र (DIC) आवेदन और दस्तावेजों की तकनीकी और व्यावहारिक जांच करते हैं।
उसके बाद जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में गठित एक जिला स्तरीय टास्क फोर्स कमेटी आवेदक का एक छोटा साक्षात्कार लेती है।
इस साक्षात्कार में आवेदकों को अपने बिजनेस आइडिया को विस्तार से समझाना होता है।
कमेटी से मंजूरी मिलते ही आवेदन को ऋण स्वीकृति के लिए संबंधित सरकारी या राष्ट्रीयकृत बैंक को ऑनलाइन रूप से आगे भेज दिया जाता है।
ऋण
कैसे मिलता है बिना गारंटी ऋण?
टास्क फोर्स कमेटी की स्वीकृति के बाद बैंक 30 दिनों के भीतर प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता देखकर ऋण को मंजूरी दे देता है।
बैंक कोई संपत्ति या गारंटर नहीं मांगता, क्योंकि इसकी गारंटी सरकार देती है। उसके बाद बैंक आवेदक के खाते में 5 लाख रुपये जमा करा देता है।
इस पर लगने वाला ब्याज सरकार खुद बैंक को चुकाती है, इसलिए युवा को सिर्फ मूलधन की किश्तें ही चुकानी होती हैं और उस पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ता है।
जानकारी
सरकार की ओर से दी जाती है 10 प्रतिशत की सब्सिडी
सरकार उद्योग की लागत का 10 प्रतिशत हिस्सा आवेदक को सब्सिडी के रूप में भी देती है, जिससे उन पर शुरुआती वित्तीय बोझ और कम हो जाता है। उद्योग के आगे सफल होने पर यह सब्सिडी और भी बढ़ाई जा सकती है।
लाभ
क्रेडिट सीमा बढ़ाने का भी है प्रावधान
योजना में आवेदक अपने व्यवसाय में डिजिटल वित्तीय लेनदेन को बढ़ावा देता है और समय (निर्धारित 4 वर्ष) पर ऋण की किश्तें चुकाता है, तो वह अगले चरण के लिए पात्र हो जाता है।
दूसरे चरण में उसे साढ़े 7 लाख रुपये और तीसरे चरण में 10 लाख रुपये तक बिना गारंटी ऋण मिल सकता है।
कुछ विशेष विनिर्माण इकाइयों के लिए इसे 20-25 लाख रुपये तक भी बढ़ाया जा सकता है, जिसमें 50 प्रतिशत तक ब्याज सब्सिडी मिलती है।
स्थापना
कैसे होती है उद्योग की स्थापना?
आवेदक ऋण मिलते ही दुकान या फैक्ट्री किराए पर लेता है और आवश्यक मशीनों के साथ कच्चा माल खरीदता है।
चूंकि एक अकेला व्यक्ति विनिर्माण या बड़ी सेवा इकाई अकेले नहीं चला सकता है, ऐसे में वह काम की गति बढ़ाने के लिए अपने पहले स्थानीय कर्मचारी या सहायक को नौकरी पर रखता है।
इसके साथ ही वह अपने व्यवसाय को 'उद्यम' पर पंजीकृत कराकर पूरी तरह एक औपचारिक बिजनेस मालिक बन जाता है। यही इस योजना का उद्देश्य है।
खासियत
क्या है इस योजना की मुख्य खासियत?
यह योजना केवल कागजी डिग्री नहीं, बल्कि व्यावहारिक हुनर को प्राथमिकता देती है। अगर, किसी युवा ने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना में प्रशिक्षण लिया है तो वह योजना के लिए पात्र होता है।
यह युवाओं के बिजनेस आइडिया को पैसों की कमी के कारण मरने नहीं देती है।
यह युवाओं को रोजगार शुरू करने में मदद के साथ उनमें उद्यमिता की मानसिकता पैदा करती है और उन्हें आगे बढ़ने में लगातार मदद करती है।
सफलता
अब तक कितनी सफल हुई है यह योजना?
उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस योजना में अब तक 1.47 लाख युवाओं को सीधा लाभ मिल चुका है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में 4.51 लाख से अधिक नए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
इस योजना की भारी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यही है कि यह रोजगार, उद्यमिता, बैंक ऋण और पात्रता संबंधी व्यावहारिक जानकारी को एक साथ एक ही प्लेटफॉर्म पर लाती है।
योजना का लक्ष्य हर साल 1 लाख नए उद्यमी पैदा करना है।