Loading...
क्या है 'वंदे मातरम विधेयक' और इसमें राष्ट्रीय गीत के अपमान पर क्या सजा प्रस्तावित है?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में प्रस्तावित 'वंदे मातरम विधेयक' पेश करेंगे

क्या है 'वंदे मातरम विधेयक' और इसमें राष्ट्रीय गीत के अपमान पर क्या सजा प्रस्तावित है?

Jul 20, 2026
01:47 pm

क्या है खबर?

केंद्र सरकार राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में एक महत्वपूर्ण संशोधन पेश करने जा रही है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को वही कानूनी संरक्षण प्रदान करना है जो वर्तमान में राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' को प्राप्त है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में प्रस्तावित 'वंदे मातरम विधेयक' पेश करने वाले हैं। आइए जानते हैं यह क्या है और इसमें किस सजा का प्रावधान है।

बदलाव

प्रस्तावित विधेयक से क्या बदलाव आएंगे?

प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संबंधी अधिनियम में संशोधन करना है ताकि वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण प्राप्त हो सके।

एक बार लागू होने के बाद राष्ट्र गीत का जानबूझकर अपमान करना या उसके गायन के दौरान जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करना राष्ट्रगान से जुड़े मामलों में पहले से लागू दंडों के समान आपराधिक दंडों को आकर्षित कर सकता है।

यह कदम राष्ट्रगीत के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में उठाया जा रहा है।

प्रावधान

विधेयक के प्रमुख प्रावधान और नियम

विधेयक में राष्ट्रगीत के गायन और सम्मान में दिशा-निर्देश और नियम बनाए गए हैं।

इसमें सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत से पहले राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य होगा। गायन में सभी 6 अंतरों को पूरा गाया आवश्यक होगा।

राष्ट्रगीत को 3 मिनट और 10 सेकंड में संपन्न करना होगा। सभी लोगों को सम्मानपूर्वक 'सावधान' की मुद्रा में खड़ा होना होगा।

इसी तरह सभी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा से पहले वंदे मातरम गाना अनिवार्य करना भी प्रस्तावित है।

ADVERTISEMENT

सजा

राष्ट्रगीत का अपमान करने पर क्या होगी सजा?

प्रस्तावित विधेयक के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत का अपमान करता है या इसके गायन में बाधा डालता है, तो उसे अपराध माना जाएगा।

इसमें दोषी पाए जाने पर अधिकतम 3 साल तक की कैद हो सकती है और दोषी व्यक्ति पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

अपराध की गंभीरता के आधार पर जेल और जुर्माना दोनों सजाएं एक साथ भी दी जा सकती है।

ऐसे में यह विधेयक वर्तमान में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

ADVERTISEMENT

विरोध

विधेयक पर क्या है राजनीतिक विरोध?

संसद में पेश होने से पहले ही विधेयक को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है।

सरकार और भाजपा का कहना है कि यह विधेयक राष्ट्र के गौरव और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को सुदृढ़ करने के लिए बेहद जरूरी कदम है।

कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने इस कदम की आलोचना की है। विपक्ष का आरोप है कि यह कानून मोदी सरकार की 'जेल फर्स्ट' (पहले जेल भेजने) की शासन शैली को दर्शाता है।

विचार

क्या है सरकार और विपक्ष के विचार?

सरकार और भाजपा का मानना है कि स्वतंत्रता संग्राम के इस सबसे बड़े प्रतीक को वही कानूनी दर्जा मिलना चाहिए जो राष्ट्रगान को प्राप्त है।

इसके उलट विपक्ष का मानना है कि राष्ट्रभक्ति की भावनाओं को जबरन थोपने और हर बात पर जेल की सजा का प्रावधान करने से नागरिकों के अधिकारों का हनन होता है।

चूंकि संसद का मानसून सत्र शुरू हो चुका है, इसलिए इस विधेयक को लेकर दोनों सदनों में भारी हंगामा होने के पूरे आसार हैं।

पृष्ठभूमि

वंदे मातरम किसने लिखा था?

वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह राष्ट्रगान 6 छंदों का है और संस्कृत और बंगाली भाषा के मिश्रण में लिखा गया है।

इसे सर्वप्रथम 1896 में कलकत्ता में सार्वजनिक रूप से गाया गया था और मूल रूप से यह बंकिम चंद्र के प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ था।

दशकों से यह गीत भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय पहचान के सबसे स्थायी प्रतीकों में से एक बन गया है।

ADVERTISEMENT