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क्या है 'जिहादी ड्रग' जिसे भारत में पहली बार किया गया जब्त?
भारत में पहली बार 'जिहादी ड्रग' के नाम से मशहूर कैप्टागन ड्रग बरामद की गई है

क्या है 'जिहादी ड्रग' जिसे भारत में पहली बार किया गया जब्त?

May 18, 2026
08:16 pm

क्या है खबर?

भारत ने पहली बार बड़ी मात्रा में कैप्टागन नामक सिंथेटिक उत्तेजक मादक पदार्थ जब्त किया गया है, जिसे अक्सर 'जिहादी ड्रग' कहा जाता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि अधिकारियों ने 'ऑपरेशन रेजपिल' नामक एक समन्वित अभियान के दौरान इस मादक पदार्थ को जब्त किया, जिसे 'गरीब आदमी का कोकीन' भी कहा जाता है। आइए जानते हैं कैप्टागन ड्रग क्या है, इसके क्या दुष्परिणाम हैं और इसका 'जिहादी ड्रग' उपनाम कैसे पड़ा।

कार्रवाई

'ऑपरेशन रेजपिल' के तहत जब्त की गई 227.7 किलोग्राम ड्रग

अधिकारियों के अनुसार, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की ओर से चलाए गए 'ऑपरेशन रेजपिल' के तहत नई दिल्ली के नेब सराय स्थित एक आवास और गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से लगभग 182 करोड़ रुपये कीमत की कैप्टागन की 227.7 किलोग्राम टैबलेट और पाउडर जब्त किया गया है। इस मामले में एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार भी किया गया है, जिसका कथित तौर पर एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से संबंध है। NCB अब आगे की जांच में जुटी है।

बयान

शाह ने क्या जारी किया बयान?

इस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री शाह ने एक्स पर लिखा, 'मोदी सरकार 'नशा मुक्त भारत' के लिए दृढ़ संकल्पित है। हमारी एजेंसियों ने पहली बार कैप्टागन (जिहादी ड्रग) जब्त किया है। मध्य पूर्व जा रही ड्रग्स की खेप को जब्त करना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, ड्रग्स के खिलाफ हमारी शून्य सहिष्णुता की प्रतिबद्धता के शानदार उदाहरण हैं। मैं इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए NCB के बहादुर और सतर्क जवानों को सलाम करता हूं।'

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ड्रग

क्या है कैप्टागन ड्रग?

कैप्टागन को मूल रूप से फेनेथिलिन के नाम से जाना जाता था। टेनेसी विश्वविद्यालय के अनुसार, इसका उत्पादन सबसे पहले 1960 के दशक में जर्मनी में हुआ था। इसका उद्देश्य अति-उत्तेजक बच्चों के साथ-साथ अवसाद और नार्कोलेप्सी से पीड़ित रोगियों का इलाज करना था। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें एम्फैटेमिन, कैफीन, मेथाम्फेटामाइन और अन्य कृत्रिम रसायनों का मिश्रण होता है। ऐसे में इसका लगातार सेवन करना मानव शरीर के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है।

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प्रतिबंध

समय के साथ ड्रग पर लगे प्रतिबंध

अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, कैप्टागन एक सिंथेटिक एम्फैटेमिन-प्रकार का उत्तेजक पदार्थ है। अमेरिका में इसे 1981 से नियंत्रित पदार्थ अधिनियम की अनुसूची I में सूचीबद्ध किया गया है। बाद में उपयोगकर्ताओं द्वारा मतिभ्रम, दृश्य विकृति और मनोविकार की शिकायत के बाद इसे वापस ले लिया गया। इसे हृदय गति रुकने, दौरे पड़ने और भ्रम जैसी दुर्लभ घटनाओं से भी जोड़ा गया था। 1980 के दशक में कई देशों ने इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए इस पर प्रतिबंध लगा दिया।

सख्ती

भारत में NDPS अधिनियम में आती है कैप्टागन

कैप्टागन को संयुक्त राष्ट्र मनोविकार संबंधी कन्वेंशन की अनुसूची II में शामिल किया गया। भारत में यह नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (NDPS) अधिनियम के तहत विनियमित है। हालांकि, लगभग 2013 तक, फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, लक्जमबर्ग और नीदरलैंड जैसे कुछ यूरोपीय देशों ने नार्कोलेप्सी के लिए इसके सीमित चिकित्सीय उपयोग की अनुमति दी थी। उसके बाद समय के साथ इसका कानूनी उत्पादन लगभग बंद हो गया, लेकिन वर्तमान में इसका अवैध उत्पादन जारी है।

रूप

कैप्टागन ने कैसे लिया 'जिहादी ड्रग' का रूप?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, कैप्टागन का निर्माण दक्षिणी यूरोप और पश्चिम एशिया की गुप्त दवा प्रयोगशालाओं में किया जाता है। इसे सऊदी अरब में सबसे लोकप्रिय नशीले पदार्थों में से एक माना जाता है। इसे 'जिहादी ड्रग' उपनाम इसलिए मिला है क्योंकि इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकवादी समूह युद्ध और अभियानों में सहनशक्ति, एकाग्रता और निडरता बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। यह सतर्कता बढ़ाने, थकान कम करने और भूख को दबाने में भी सहायक बताया जाता है।

जानकारी

सीरिया के गृहयुद्ध में बड़ी मात्रा में मिला कैप्टागन

रिपोर्टों के अनुसार, सीरिया में गृहयुद्ध के दौरान बड़ी मात्रा में कैप्टागन पाया गया था। बशर अल-असद की पूर्व सरकार के तस्करी नेटवर्क और क्षेत्रीय तस्करी अभियानों से संबंध थे। कैप्टागन को सुख, आनंद और परमानंद की अनुभूति का जरिया माना जाता है।

दुष्प्रभाव

कैप्टागन के प्रमुख दुष्प्रभाव क्या हैं?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, कैप्टागन के सेवन से हृदय गति में वृद्धि, शरीर का तापमान बढ़ोतरी, तेज सांस, उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर जैसे अल्पकालीन दुष्प्रभाव और अत्यधिक अवसाद, सुस्ती, नींद का अभाव, हृदय और रक्त वाहिका की विषाक्तता और कुपोषण जैसे दीर्घटकाली दुष्परिणामों का खतरा रहता है। इसके अलावा लंबे समय तक उपयोग से इसकी लत लग सकती है, व्यवहार में बदलाव आ सकता है और संज्ञानात्मक कार्यक्षमता कमजोर हो सकती है।

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