क्या है चुनाव आयोग का गुप्त सॉफ्टवेयर, जिसकी छिपाई जा रही जानकारी?
क्या है खबर?
चुनाव आयोग ने मतदाताओं के लिए इस साल जो ECINet डिजिटल सिस्टम बनाया था, वह अब सवालों के घेरे में है। इस सॉफ्टवेयर तक राज्य के चुनाव अधिकारियों तक पहुंच नहीं है, जिससे मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने में केंद्रीय चुनाव आयोग कार्यालय की मनमानी के आरोप लग रहे हैं। राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने इस सॉफ्टवेयर से संबंधित जानकारी RTI से मांगी थी, जिसे देने से इनकार कर दिया गया है। क्या है ये सॉफ्टवेयर? आइए, जानते हैं।
विवाद
क्या है ये सॉफ्टवेयर?
ECINet एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने लॉन्च किया था। इसमें आयोग के 40 ऐप्स और इलेक्टोरल रोल ऑफिसर्स नेटवर्क (ERONET) जैसे पोर्टल जुड़े हुए हैं।
ERONET मतदाता पंजीकरण, सुधार, माइग्रेशन (स्थान परिवर्तन), नाम हटाने और सूची की शुद्धता बनाए रखने की प्रक्रिया को डिजिटल और मानकीकृत बनाता है। इसमें फॉर्म भी भरे जाते हैं।
ये फॉर्म ERONET में प्रोसेस होते हैं। पहले हर राज्य के अलग-अलग सिस्टम थे। ERONET ने इन्हें एकीकृत किया।
विवाद
विवादों में क्यों है ये सॉफ्टवेयर?
ERONET का उपयोग विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान किया गया और उसी समय यह विवादों में ज्यादा आया है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस सवाल उठाए।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने भी आपत्ति जताई है। आरोप है कि सॉफ्टवेयर IT प्रमुख सीमा खन्ना के स्तर पर केंद्रित हो गया है।
सॉफ्टवेयर तक मतदाताओं का नाम जोड़ने-हटाने के काम में लगे राज्य चुनाव अधिकारियों तक की पहुंच नहीं है।
सूचना
राज्यसभा सांसद ने क्या मांगी थी जानकारी?
गोखले ने बताया चुनाव आयोग SIR में इस्तेमाल सॉफ्टवेयर की जानकारी छिपा रहा है और कह रहा है कि इससे व्यापारिक रहस्य और व्यापारिक भरोसे पर असर पड़ेगा।
उन्होंने आयोग ने सॉफ्टवेयर से संबंधित कुछ जानकारी मांगी थी, लेकिन आयोग ने जानकारी देने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि इस सॉफ्टवेयर में एक अपारदर्शी (ओपेक) एल्गोरिदम है, जिसका इस्तेमाल दिल्ली में एक सेंट्रलाइज़्ड सिस्टम के ज़रिए (EROs को दरकिनार करके) वोटरों के नाम हटाने के लिए किया गया है।
जानकारी
गोखले ने पूछे ये सवाल
गोखले ने सवाल किया कि आयोग का यह गुप्त सॉफ़्टवेयर क्या है और इसे किस कंपनी ने बनाया है? जानकारी क्यों छिपाई जा रही है, किस गुप्त एल्गोरिदम का इस्तेमाल हो रहा है और टेंडर पाने वाली कंपनी का नाम क्यों छिपाया जा रहा है।