भारत-बांग्लादेश सीमा पर 142.79 एकड़ जमीन BSF को सौंपी गई, पूरे इलाके में लगेगी बाड़
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित भाजपा सरकार ने बांग्लादेश से घुसपैठ रोकने के लिए पड़ोसी देश से लगने वाली सीमा पर सख्ती बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि उनकी सरकार ने करीब 9 जिलों की 142.79 एकड़ जमीन सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दी है, जो पिछले काफी समय से प्रस्तावित थी। अब पूरे इलाके में बाड़ लगाने के काम शुरू होगा, जिससे घुसपैठ पर लगाम लगेगी।
आदेश
इन जिलों की इतने एकड़ जमीन सौंपी
सुवेंदु ने एक्स पर लिखा, 'पश्चिम बंगाल सरकार ने BSF की चौकियां और कंटीले तारों की बाड़ बनाने में मदद करके सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, जिससे सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा और बढ़ गई है।' सरकार ने मुर्शिदाबाद की 38.805 एकड़, जलपाईगुड़ी की 35.165, कूचबिहार की 22.95, दक्षिण दिनाजपुर की 20.1701, मालदा की 10.90, दार्जिलिंग की 8.815, उत्तर दिनाजपुर की 2.84, उत्तर 24 परगना की 2.6 और नदिया की 0.55 एकड़ जमीन सौंपी है।
जमीन
दक्षिण बंगाल में सबसे अधिक घुसपैठ
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बंगाल में 2023 से 2025 के बीच, पिछले 3 साल में 2,688 बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा गया है। इसमें सबसे अधिक दक्षिण बंगाल से 2410 और उत्तर बंगाल से 278 वापस भेजे गए हैं। सबसे अधिक घुसपैठ कुल बंगाल में घुसपैठ की 90 प्रतिशत की घटनाएं मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना और मालदा में है, जहां 30 किलोमीटर से भी अधिक सीमा पर बाड़ लगाई जाएगी।
ट्विटर पोस्ट
सुवेंदु अधिकारी ने दी जानकारी
Govt of WB has initiated intensified measures to strengthen Border Security by facilitating construction of BSF Outposts & Barbed-Wire Fencing, further enhancing security in the Border areas.
— Suvendu Adhikari (@SuvenduWB) May 27, 2026
Additional land has now been handed over to BSF, taking the total tally to 142.79 acres. pic.twitter.com/VutOsdOunH
बाड़
अभी 850 किलोमीटर सीमा पर लगनी है बाड़
पश्चिम बंगाल बांग्लादेश के साथ 4,097 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, लगभग 3,240 किलोमीटर की सीमा पर बाड़ लग चुकी है, जबकि लगभग 850 किलोमीटर पर अभी बाड़बंदी नहीं है, इसमें 175 किलोमीटर दुर्गम भूभाग शामिल है। सुवेंदु ने दावा किया कि प्रस्तावित 127 किलोमीटर के खंड में केवल 8 किलोमीटर के हिस्से को ही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार में सील किया गया था। भाजपा ममता पर हीलाहवाली का आरोप लगाती थी।