उत्तराखंड के जिम मालिक मोहम्मद दीपक को सुप्रीम कोर्ट से राहत, उनके खिलाफ कार्रवाई पर रोक
क्या है खबर?
उत्तराखंड में मुस्लिम दुकानदारों के उत्पीड़न के खिलाफ खड़े होने वाले देहरादून के जिम मालिक दीपक कुमार (मोहम्मद दीपक) को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। कोर्ट ने सोमवार को उनके खिलाफ दायर दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं की शिकायत पर किसी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने दीपक द्वारा दायर याचिका पर अंतरिम आदेश पारित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में उत्तराखंड सरकार से भी जवाब मांगा है।
सुनवाई
दीपक ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के निर्देश को दी थी चुनौती
दीपक ने सु्प्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उत्तराखंड हाई कोर्ट के निर्देश को चुनौती दी थी, जिसने मार्च 2026 में उनके खिलाफ FIR रद्द करने से इनकार कर दिया था।
साथ ही, कोर्ट ने मामले पर दीपक के सोशल मीडिया पर बोलने से भी रोक लगाई थी। कोर्ट को आशंका थी कि इससे पुलिस जांच में बाधा आएगी।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि FIR की कार्यवाही और हाई कोर्ट के आदेश का प्रभाव और संचालन स्थगित रहेगा।
मामला
क्या है दीपक कुमार का मामला?
इस साल, 26 जनवरी को बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने देहरादून में एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार से उनकी दुकान से 'बाबा' शब्द हटाने को कहा।
दीपक ने इसका विरोध किया तो उनकी कहासुनी हो गई। संगठन के लोगों ने उनका नाम पूछा तो उन्होंने मोहम्मद दीपक बताया, जबकि उनका नाम दीपक कुमार है।
बाद में कार्यकर्ताओं ने उनके खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया।
दीपक ने इसे हाई कोर्ट ने चुनौती दी, जिसे खारिज कर दिया गया था।
चर्चा
राहुल गांधी समेत कई लोगों ने ली थी जिम की सदस्यता
घटना के बाद दीपक का सामूहिक रूप से बहिष्कार किया गया और उनकी जिम की सदस्यता घट गई, जिसके बाद राहुल गांधी ने उनसे मुलाकात की और उनके जिम की सदस्यता लेने का आह्वान किया।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद जॉन ब्रिटास ने भी दीपक के जिम का दौरा किया, सदस्यता ली और उन्हें "आशा की सच्ची किरण" बताया।
दीपक का कारोबार घटने पर 15 सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने भी सामूहिक रूप से उनके जिम की वार्षिक सदस्यता खरीदी।