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उत्तर प्रदेश में सैंकड़ों ​​​​नई इलेक्ट्रिक बसों से आसान-सुविधाजनक होगा सफर, किन-किन शहरों में मिलेगी सुविधा?
उत्तर प्रदेश में 1,725 ​​​​नई ई-बसों को 18 शहरों में चलाया जाएगा

उत्तर प्रदेश में सैंकड़ों ​​​​नई इलेक्ट्रिक बसों से आसान-सुविधाजनक होगा सफर, किन-किन शहरों में मिलेगी सुविधा?

लेखन गजेंद्र
Aug 04, 2026
01:13 pm

क्या है खबर?

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हाल ही में प्रदेश के 18 शहरों में 1,725 नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें (ई-बस) चलाने की मंजूरी दी है। यह बसें चरणबद्ध तरीके से चलाई जाएंगी, जिससे शहरों में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाकर प्रदूषण कम किया जाएगा। ये बसें प्रदेश में पहले से चल रहीं करीब 743 ई-बसें के अतिरिक्त होंगी। इन बसों को निजी ऑपरेटर चलाएंगे, जिन्हें सरकार भुगतान करेगी। बसों से सार्वजनिक परिवहन कितना सुधरेगा? आइए, जानते हैं।

परिवहन

किन-किन शहरों में चलेंगी नई ई-बसें?

ये बसें लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी और नोएडा में चलेंगी।

बसें शहरों में शहरी क्षेत्रों के अलावा परिधि वाले ग्रामीण इलाकों को भी कवर किया जाएगा।

राज्य सरकार लखनऊ और कानपुर में 300-300, वाराणसी में 250, गोरखपुर में 150, आगरा, गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा में 100-100, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज में 50-50, अलीगढ़, बरेली, फिरोजाबाद, झांसी, मुरादाबाद, सहारनपुर और शाहजहांपुर में 25-25 बसें चलाएगी।

परिवहन

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक होगी पहुंच

ये बसें न केवल अलग-अलग शहरों में ही कनेक्टिविटी को बेहतर करेंगी, बल्कि जेवर में बने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक भी पहुंच आसान करेगा।

नोएडा से दिल्ली हवाई अड्डा पास है, जबकि नोएडा हवाई अड्डा दूर है। ऐसे में वहां तक कोई साधन न होने से लोग चिंतित थे।

ऐसे में नई ई-बसें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) से हवाई अड्डे तक चलेंगी। यहां 45 बसें 15 जून से शुरू भी की गई हैं।

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फायदा

कितनी फायदेमंद साबित होंगी ई-बसें?

यह बसें कई मायनों में लोगों के लिए फायदेमंद साबित होंगी। दरअसल, इसकी कनेक्टिविटी सबसे बड़ी खासियत होगी, जो सिर्फ शहरों में नहीं बल्कि 15 से 20 किलोमीटर की परिधि और ग्रामीण इलाकों तक भी होगी।

इससे लोग नौकरी और अपने व्यवसाय के लिए आराम से आ-जा सकेंगे। लोगों को महंगे परिवहन विकल्प से निजात मिलेगी।

ये बसें वातानुकूलित होंगी, जिससे गर्मी में राहत मिलेगी। पूर्णतया इलेक्ट्रिक होने के कारण कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण भी नहीं होगा।

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खासियत

बसों की क्या होगी खासियत?

यह बसें 2 आकार में होंगी, जिसमें 725 बसें 9 मीटर की और 1,000 बसें 12 मीटर की होंगी। इससे इन बसों को भीड़भाड़ वाले इलाकों में, सड़क की चौड़ाई और शहरों के आकार के मुताबिक इस्तेमाल किया जाएगा।

इन्हें पूरी तरह निजी ऑपरेटर चलाएंगे, जो चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ड्राइवर, तकनीकी स्टाफ, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगा। सरकार इनको तय हिसाब से पैसा देगी।

बसों में बैठने के लिए आरामदायक सीटें होंगी और खड़े होने के लिए पर्याप्त जगह होगी।

किराया

कितना होगा किराया?

इस परियोजना की अनुमानित लगात लगभग 1,852 करोड़ रुपये है, जिसमें राज्य सरकार पर 653 करोड़ रुपये का अनुमानित भार पड़ेगा।

सरकार की ओर से किराए की दर घोषित नहीं हुई है, जिस पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल, सरकार की ओर से जो वातानुकूलित बसें शहरों में चल रही हैं, उनका न्यूनतम किराया 12 रुपये और अधिकतम किराया 45-75 रुपये है। तो इनका किराय भी आसपास ही होगा।

इसे छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों को फायदा होगा।

बसें

प्रदेश में अभी कितनी बसें चल रही हैं?

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के बेड़े में 14,000 बसें हैं। इसे 2027 तक 25,000 करने का लक्ष्य है।

अभी प्रदेश में साधारण बसों के अलावा, जनरथ वातानुकूलित, स्लीपर, शताब्दी बसें, वॉल्वो और स्कैनिया प्रीमियम बसें और इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं।

शहरों में ई-बस नेटवर्क को 2,468 तक पहुंचाने का लक्ष्य है। प्रदेश में रोजाना करीब 20 लाख लोग बस यात्रा करते हैं।

सरकार 1,140 डीजल-CNG शहरी बसों की जगह 1,225 नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद मंजूरी दे चुकी है।

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