सुप्रीम कोर्ट में 33 की जगह 37 होगी न्यायाधीशों की संख्या, प्रस्ताव को केंद्र की मंजूरी
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) को छोड़कर अन्य न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह कदम न्यायिक क्षमता में सुधार लाने और मामलों के निपटारे में तेजी लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। अदालतों की संख्या में पिछली बार वृद्धि किए जाने के लगभग 6 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया।
कारण
सरकार ने क्या बताया प्रस्ताव को मंजूरी देने का कारण?
सरकार ने कहा कि इस विस्तार का उद्देश्य लंबित मामलों की बढ़ती संख्या से निपटना है, जिसमें वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 92,000 से अधिक मामले निर्णय के लिए लंबित हैं। इस प्रस्ताव को प्रभावी बनाने के लिए मंत्रिमंडल ने संसद में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने की मंजूरी दे दी। इस विधेयक का उद्देश्य 1956 के अधिनियम में संशोधन करना है, जिससे न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि की जा सके।
संख्या
इस अनुच्छेद के तहत निर्धारित होती है न्यायाधीशों की संख्या
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट में CJI और अन्य न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित होती है। इससे सरकारों को बढ़ते मामलों की संख्या के जवाब में समय-समय पर अदालतों की संख्या में संशोधन करने की सुविधा मिली है। साल 1956 में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम लागू हुआ, तो CJI के अलावा न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 10 निर्धारित की गई थी। इसे 1960 में बढ़ाकर 13 और 1977 में 17 कर दिया गया।
सीमा
1979 तक तक 15 तक सीमित रही थी न्यायाधीशों की संख्या
साल 1979 तक न्यायाधीशों की संख्या प्रभावी रूप से 15 तक ही सीमित रही। हालांकि, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध के बाद इस सीमा को हटा दिया। उसके बाद दशकों में विस्तार होता रहा, जिसके परिणामस्वरूप स्वीकृत संख्या 1986 में बढ़कर 25 और 2008 में 30 हो गई। सबसे हालिया संशोधन 2019 में हुआ, जब संसद ने CJI को छोड़कर न्यायाधीशों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 करने को मंजूरी दी।