क्या है मदुरै पहाड़ी पर दीपक जलाने का मामला, जिसपर मद्रास हाई कोर्ट का फैसला आया?
क्या है खबर?
तमिलनाडु की मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को उस विवाद का निस्तारण कर दिया, जिसमें मदुरै पहाड़ी पर पत्थर के स्तंभ पर दीपक जलाने को लेकर राज्य सरकार की आपत्ति थी। कोर्ट के पास मुद्दा आया था कि क्या हजरत सुल्तान सिकंदर बादशाह अवुलिया दरगाह के पास, तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ियों पर स्थित एक प्राचीन पत्थर के दीपक स्तंभ पर कार्तिकई दीपम जलाया जा सकता है? इसको लेकर राज्य और अन्य अपीलकर्ताओं ने विरोध किया था। आइए, पूरा मामला जानते हैं।
विवाद
क्या है मामला?
तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ियों पर अरुलमिगु सुब्रमण्य स्वामी और सिकंदर बादशाह दरगाह दोनों स्थित हैं। पिछले दिनों हिंदू तमिल पार्टी के नेता रामा रविकुमार ने याचिका दायर कर स्तंभ पर कार्तिकई दीपम जलाने की अनुमति मांगी थी। इस पर एकल न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन ने फैसला सुनाया कि स्तंभ एक दीपाथून (दीपक रखने का स्थान) है और यहां दीपम जलाने की परंपरा बहाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रथा को दरगाह के अधिकारों को प्रभावित करने वाला नहीं माना जा सकता।
विवाद
राज्य सरकार ने दीपक जलाने से रोका
कोर्ट के फैसले के बाद भी मदुरै के अधिकारियों ने सार्वजनिक व्यवस्था के खतरे का हवाला देते हुए श्रद्धालुओं को पहाड़ी पर दीपक जलाने से रोक दिया था। इसके कारण 2025 का 'कार्तिकई दीपम उत्सव' बिना दीपक जलाए संपन्न हो गया। इसके बाद कोर्ट की अवमानना का मामला दर्ज किया गया, जो न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के समक्ष लंबित है। इस बीच मदुरै मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त, तमिलनाडु वक्फ बोर्ड, दरगाह ने न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के निर्देशों को चुनौती देते हुए अपील दायर की।
विवाद
राज्य सरकार ने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ क्या दिया तर्क?
कोर्ट में एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ मदुरै में अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने तर्क दिया कि पत्थर के स्तंभ को 'दीपाथून' कहने का कोई आधार नहीं है। अधिवक्ता जनरल पीएस रमन ने कहा कि कार्तिकई दीपम के लिए उक्त स्तंभ को प्रज्वलित करने की कोई प्रमाणित परंपरा नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या न्यायमूर्ति स्वामीनाथन तिरुपरनकुंड्रम में प्रचलित न होने वाली इस प्रथा को बहाल करने का आदेश दे सकते थे?
फैसला
आज क्या आया मद्रास हाई कोर्ट का फैसला?
न्यायमूर्ति जी जयचंद्रन और केके रामकृष्णन की पीठ ने मंगलवार को आदेश दिया कि देवस्थानम को दीपथून के अवसर पर दीप प्रज्वलित करना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि दीपक जलाने को चुनौती देने वालों ने यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया कि इस दीपक को जलाना आगम शास्त्रों द्वारा अनुमत नहीं है। पीठ ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि पहाड़ी की चोटी पर दीपक जलाने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
आदेश
दीपक प्रज्वलन के दौरान आम जनता को जाने की अनुमति नहीं
कोर्ट ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) पहाड़ी पर स्थित स्मारक को संरक्षित करने के लिए शर्तें लगा सकता है। उन्होंने अशांति के तर्क को मनगढ़ंत और अविश्वास पैदा करने वाला बताया। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि दीपाथून के अवसर पर दीप प्रज्ज्वलन के लिए मंदिर के देवस्थानम में जनता को जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने जिला कलेक्टर को इस कार्यक्रम की निगरानी और समन्वय करने का निर्देश दिया है।
महाभियोग
संसद में न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग
स्तंभ पर दीपक जलाने की अनुमति देने का फैसला मदुरै पीठ के न्यायाधीश स्वामीनाथन के लिए मुसीबत बन गया। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और INDIA गठबंधन के सांसदों ने न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपा था। इसमें 100-120 सांसदों के हस्ताक्षर थे। हालांकि, अभी इसे स्वीकार नहीं किया गया। विपक्ष का आरोप है कि जज का फैसला पक्षपाती, राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित और संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ है।