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सोहराबुद्दीन मामले में अमित शाह की रिहाई पर पुनर्विचार नहीं करेगा सुप्रीम कोर्ट
सोहराबुद्दीन शेख और उनकी पत्नी कौसर बी की गुजरात में कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी (फाइल तस्वीर)

सोहराबुद्दीन मामले में अमित शाह की रिहाई पर पुनर्विचार नहीं करेगा सुप्रीम कोर्ट

लेखन गजेंद्र
Sep 28, 2026
07:12 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति को फर्जी मुठभेड़ में मारे जाने के मामले में सुनवाई की। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि वह 2014 में मामले में बरी होने के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रिहाई पर पुनर्विचार नहीं करेगा। हालांकि, पीठ ने 21 पुलिसकर्मियों सहित सभी 22 आरोपियों की रिहाई पर जवाब मांगा है।

नोटिस

कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति बागची ने कहा, "हमें उम्मीद है कि आप उस फैसले पर हमला नहीं कर रहे हैं, जिसमें शाह की रिहाई पर सवाल उठाने वाली याचिका को खारिज किया गया था।"

CJI ने भी इस पर सहमति जताई। उन्होंने कहा, "हम कुछ गवाहों के बयान देखना चाहेंगे... जहां तक ​​बरी होने का सवाल है। इस पर दोबारा विचार करने का कोई सवाल ही नहीं है।"

कोर्ट ने चिंता जताई कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान 92 गवाह मुकर गए थे।

याचिका

सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन ने दायर की है याचिका

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

याचिका में बॉम्बे हाई कोर्ट के 7 मई के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें मुठभेड़ मामले में सभी आरोपियों को बरी किया गया था।

न्यायाधीश एमबी गोसावी ने दिसंबर 2014 में शाह को मामले से बरी किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने शाह को मामले से बरी करने के फैसले को बरकरार रखा।

शाह 2002-2010 तक गुजरात के गृह मंत्री थे।

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घटना

2005 का है मामला

वांछित अपराधी सोहराबुद्दीन को 23 नवंबर, 2005 को कथित तौर पर कौसर और प्रजापति के साथ हैदराबाद-सांगली लग्जरी बस से अगवा किया गया।

CBI ने दावा किया कि शेख-प्रजापति को पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ में मार दिया, जबकि कौसर की हत्या कर शव को ठिकाने लगा दिया।

मामला गुजरात में दर्ज हुआ, CBI के अनुरोध पर 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे मुंबई स्थानातरित कर दिया।

मुकदमे के बीच न्यायाधीश बीएच लोया की 2014 में रहस्यमयी मौत हो गई थी।

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जानकारी

2018 में बरी हुए थे सभी आरोपी

21 दिसंबर 2018 को, CBI के विशेष न्यायाधीश एसजे शर्मा ने सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया, जिनमें गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश के सेवारत और सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी शामिल थे। मामले में 210 गवाहों से पूछताछ हुई, जिसमें 92 गवाह मुकर गए थे।

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