क्या खत्म होगा बहुविवाह? सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए हुआ राजी
सुप्रीम कोर्ट ने बहुविवाह प्रथा की संवैधानिकता पर सुनवाई के लिए हामी भर दी है। इस प्रथा के तहत मुस्लिम पुरुष एक से ज्यादा पत्नियां रख सकते हैं। 'भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन' (BMMA) और कई अन्य संगठनों ने इस प्रथा को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। उनका कहना है कि यह प्रथा समानता और भेदभाव न करने जैसे बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन करती है।
याचिका में बहुविवाह पर रोक और शादियों के पंजीकरण की मांग
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से उस कानून को खत्म करने की मांग की है जो बहुविवाह की इजाजत देता है। वे यह भी चाहते हैं कि सभी मुस्लिम शादियों का आधिकारिक पंजीकरण हो, ताकि महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षा मिल सके। अदालत ने सरकार से इस मामले पर अपना पक्ष रखने को कहा है।
साथ ही, यह भी सुझाव दिया है कि बहुविवाह पर रोक सिर्फ मुसलमानों के लिए नहीं, बल्कि सबके लिए होनी चाहिए। अदालत ने 'ट्रिपल तलाक' को लेकर दिए गए अपने पहले के फैसले का हवाला दिया है। अगस्त 2017 में 'ट्रिपल तलाक' को असंवैधानिक करार दिया गया था और बाद में 2019 के 'मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम' के तहत इसे गैर-कानूनी बना दिया गया। अगर अदालत का फैसला बहुविवाह के खिलाफ आता है, तो भारत में शादी के कानूनों में बड़े बदलाव आ सकते हैं।