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भारत में स्टारलिंक की नई मंजूरी की कोशिश, एलन मस्क ने ग्रामीण इंटरनेट पर दिया जोर
ग्रामीण भारत में इंटरनेट पहुंचाने की तैयारी में स्टारलिंक

भारत में स्टारलिंक की नई मंजूरी की कोशिश, एलन मस्क ने ग्रामीण इंटरनेट पर दिया जोर

Aug 21, 2026
11:32 am

क्या है खबर?

एलन मस्क स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भारत में शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। अब उन्होंने कहा है कि यह सेवा देश के उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी कमजोर है। मस्क ने खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों का जिक्र किया। उनके मुताबिक, स्टारलिंक कम सेवा पाने वाले समुदायों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद कर सकता है। यह बयान कंपनी की भारत में दोबारा शुरू हुई मंजूरी प्रक्रिया के बीच आया है।

स्टारलिंक

स्टारलिंक कैसे पहुंचाएगा इंटरनेट?

स्टारलिंक पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सेवा देता है।

इसके सैटेलाइट लगभग 550 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करते हैं, जिससे पारंपरिक दूर स्थित सैटेलाइट नेटवर्क की तुलना में डाटा जल्दी पहुंच सकता है। इसके लिए मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क की जरूरत नहीं होती, बल्कि ग्राहक के पास विशेष किट होनी चाहिए।

यही वजह है कि दूरदराज गांवों में, जहां फाइबर बिछाना या टावर लगाना महंगा है, यह विकल्प उपयोगी हो सकता है।

उपयोगी

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए क्यों हो सकता है उपयोगी?

भारत के कई ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में मोबाइल टावर या तेज इंटरनेट की सुविधा अभी सीमित है।

ऐसे क्षेत्रों में स्टारलिंक सीधे सैटेलाइट से कनेक्टिविटी देने का विकल्प दे सकता है। बाढ़ या भूकंप जैसी आपदा के दौरान भी यह उपयोगी हो सकता है, जब मोबाइल टावर या बिजली व्यवस्था प्रभावित हो जाए।

हालांकि, स्टारलिंक हर जगह पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क की जगह नहीं ले सकता। इसकी क्षमता सीमित है और कम आबादी वाले इलाकों में प्रभावी हो सकता है।

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मंजूरी

भारत में अभी मंजूरी का इंतजार

स्टारलिंक ने भारत में अपनी सेवा शुरू करने के लिए जेन 2 सैटेलाइट नेटवर्क की मंजूरी हेतु इन-स्पेस में दोबारा आवेदन किया है।

इस नेटवर्क में सीधे मोबाइल उपकरणों से कनेक्ट होने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि, कंपनी को अभी सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन जैसी जरूरी प्रक्रियाओं से गुजरना है।

भारत में किसी गैर-जियोस्टेशनरी सैटेलाइट कंपनी ने अभी व्यावसायिक सेवा शुरू नहीं की है। दूरसंचार कंपनियां भी सैटेलाइट सेवाओं के लिए समान नियमों की मांग कर रही हैं।

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ट्विटर पोस्ट

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