सुप्रीम कोर्ट से हेमंत सोरेन को राहत, ED समन नजरअंदाज करने के मामले में कार्यवाही नहीं
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राहत देते हुए उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। ED ने सोरेन के खिलाफ यह कार्यवाही धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जारी समन की जानबूझकर अवज्ञा करने के आरोप में शुरू की थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की पीठ ने बुधवार को यह फैसला सुनाया और ED को भी नोटिस जारी किया है।
समन
सोरेन ने दायर की थी याचिका
ED ने रांची के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष समन के उल्लंघन के संबंध में आपराधिक शिकायत दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने अनुमति दे दी। इसके बाद सोरेन झारखंड हाई कोर्ट गए, जिसने इसे रद्द नहीं किया। तब सोरेन ने विशेष अनुमति याचिका दायर की। ED के वकील ने कहा कि सोरेन 7 बार समन भेजने के बावजूद पेश नहीं हुए। सोरेन के वकील ने कहा कि वह 3 बार पेश हुए और आपने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
नसीहत
CJI ने ED को नसीहत दी
आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाने के बाद CJI ने ED को मौखिक रूप से कहा, "कल हमने अखबार में पढ़ा कि आपने (ED) बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराई हैं। उन शिकायतों पर ध्यान केंद्रित करें और अपनी ऊर्जा लगाएं। आपको कुछ सकारात्मक परिणाम जरूर मिलेंगे।" न्यायमूर्ति बागची ने आगे कहा कि प्रभावी अभियोजन पर ध्यान केंद्रित करें। ये आतंकवाद विरोधी मुकदमे हैं। उद्देश्य पूरा हो चुका है।
मामला
क्या है मामला?
ED ने मुख्यमंत्री के सोरेन के सहयोगी के खिलाफ मामला दर्ज कर छापे में मुख्यमंत्री से संबंधित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े दस्तावेज कथित तौर पर बरामद किए गए थे। इसके बाद ED ने PMLA के तहत मामला दर्ज किया और जांच के दौरान सोरेन को कथित जमीन के संबंध में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर बयान देने के लिए समन जारी किया गया। वह समन पर पेश नहीं हुए, जिसके बाद 31 जनवरी, 2024 को उन्हें गिरफ्तार किया गया।