सुप्रीम कोर्ट CAA को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 5 मई से शुरू करेगा सुनवाई
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को घोषणा की कि वह विवादित नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2019 और नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 5 मई से सुनवाई शुरू करेगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ प्रक्रियात्मक निर्देशों के लिए याचिकाओं पर विचार कर रही थी। बार एंड बेंच के मुताबिक, पीठ ने वकीलों से पूछा कि वे अपनी दलीलें पेश करने में कितना समय लेंगे। इसकी सुनवाई 12 मई तक चलेगी।
सुनवाई
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा, "CAA को चुनौती देने वाले 2 प्रकार के मामले हैं, एक असम-त्रिपुरा और बाकी देश। नियुक्त नोडल वकील पहले और दूसरे समूह के मामलों की पहचान करेंगे और सूची 2 सप्ताह में रजिस्ट्री को पेश करेंगे। रजिस्ट्री उन्हें 2 श्रेणियों में अलग करेगी और 5 मई से अंतिम सुनवाई के लिए क्रमानुसार सूचीबद्ध करेगी। याचिकाकर्ताओं को 5-6 मई को पहले-दूसरे पखवाड़े में, 7 मई के आधे दिन प्रतिवादियों को और 12 मई को प्रतिवाद पर सुनवाई होगी।"
याचिका
CAA के खिलाफ 243 याचिकाएं दायर हैं
संसद ने 11 दिसंबर, 2019 को CAA पारित किया और अगले दिन राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। उसी दिन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने कानून को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। अब तक 243 याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। मामले पर 18 दिसंबर, 2019 को केंद्र सरकार को नोटिस जारी हुआ, लेकिन अदालत ने कानून पर रोक नहीं लगाई। केंद्र ने अचानक 11 मार्च, 2024 को नियमों को अधिसूचित किया, जिससे यह लागू हो गया।
कानून
क्या है CAA?
CAA से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत आए हिंदुओं, जैनियों, ईसाइयों, सिखों, बौद्धों, पारसियों को नागरिकता मिल जाएगी। सीए (CAA) नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 2 में संशोधन करता है, जो 'अवैध प्रवासियों' को परिभाषित करती है, जिससे केंद्र सरकार द्वारा छूट दी गई लोगों को नागरिकता आवेदन के लिए पात्र माना जाएगा। कानून में मुस्लिम समुदाय को इस प्रावधान से बाहर रखा गया है, जिससे पूरे देश में नाराजगी है।