LOADING...
सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता पर गुवाहाटी कोर्ट का फैसला रद्द किया, कहा- जबरन कार्रवाई न हो
सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता पर गुवाहाटी हाई कोर्ट का फैसला रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता पर गुवाहाटी कोर्ट का फैसला रद्द किया, कहा- जबरन कार्रवाई न हो

लेखन गजेंद्र
Jul 13, 2026
12:21 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नागरिकता पर बड़ा फैसला देते हुए असम की गुवाहाटी हाई कोर्ट के उन फैसलों को रद्द कर दिया, जिनमें 27 लोगों को विदेशी घोषित किया गया था। कोर्ट ने कहा कि नागरिकता और विदेशी दर्जे का निर्धारण निष्पक्ष, कानूनी और उचित प्रक्रिया से होना चाहिए। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि नागरिकता का मुद्दा संवैधानिक महत्व रखता है और इसे वैध प्रक्रिया के अलावा अन्य माध्यम से नहीं छीन सकते।

सुनवाई

कोर्ट ने क्या कहा?

लाइव लॉ के मुताबिक, कोर्ट ने कहा, "नागरिकता और विदेशी का दर्जा संवैधानिक और कानूनी दृष्टि से उच्च महत्व का क्षेत्र है। अधिकारी किसी व्यक्ति को मात्र संदेह के आधार पर नागरिकता साबित करने का निर्देश नहीं दे सकते।" कोर्ट ने यह भी कहा कि संदेह का आधार बनने वाली सामग्री का खुलासा किए बिना नागरिकता साबित करने का भार किसी और पर नहीं डाला जा सकता। पीठ ने 27 व्यक्तियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक लगाई है।

विवाद

27 अपीलकर्ताओं का मामला विदेशी न्यायाधिकरणों के पास भेजा

कोर्ट ने 27 अपीलकर्ताओं की अपील को स्वीकार करते हुए हुए उनके मामलों को नए सिरे से निर्णय के लिए संबंधित विदेशी न्यायाधिकरणों को वापस भेज दिया। हालांकि, कोर्ट ने भारतीय नागरिकता के अवैध दावों को रोकने में राज्य के हित को भी स्वीकार किया है। पीठ ने कहा, "राज्य का यह सुनिश्चित करने में वैध हित है कि जो व्यक्ति नागरिकता का दावा करने के हकदार नहीं हैं, वे प्रक्रिया का दुरुपयोग करके ऐसी स्थिति प्राप्त न कर लें।"

Advertisement

आदेश

पुनर्विचार का आदेश न्यायसंगत राहत न समझें

कोर्ट ने कहा कि इस तरह की स्थिति का निर्धारण एक ऐसी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए जो निष्पक्ष, वैध और उचित हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसने भारतीय नागरिकता के लिए 27 अपीलकर्ताओं के दावों की खूबियों की जांच नहीं की है, इसलिए इनकी जांच संबंधित न्यायाधिकरण द्वारा स्वतंत्र रूप से किया जाना चाहिए। पीठ ने स्पष्ट किया कि पुनर्विचार का आदेश अपीलकर्ताओं के लिए न्यायसंगत राहत के रूप में न समझा जाए।

Advertisement

मामला

क्या है मामला?

असम के 27 लोगों को विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा विदेशी घोषित किया गया था, जिसके बाद वे गुवाहाटी हाई कोर्ट गए थे, लेकिन हाई कोर्ट ने एकतरफा आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। होई कोर्ट ने पाया कि विधिवत नोटिस तामील किए जाने के बावजूद, कोई भी प्रतिवादी न्यायाधिकरण के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ और न्यायाधिकरण के फैसले को लगभग 23 वर्षों बाद ही चुनौती दी गई। इसके बाद अपीलकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

Advertisement