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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मेट्रो-रेल पूरी तरह बंद नहीं कर सकते, जितनी जरूरी उतनी पाबंदी हो
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो बंद किए जाने को लेकर चिंता जताई है

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मेट्रो-रेल पूरी तरह बंद नहीं कर सकते, जितनी जरूरी उतनी पाबंदी हो

लेखन आबिद खान
Oct 09, 2026
03:41 pm

क्या है खबर?

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले मेट्रो बंद किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने मेट्रो बंद करने और दूसरी पाबंदियों पर चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा, "हमें मेट्रो वगैरह बंद होने की चिंता है। हमें इस बात की चिंता है। हमारी चिंता उन सैकड़ों-हजारों यात्रियों को लेकर है जो ग्रेटर नोएडा, साउथ दिल्ली से रोजी-रोटी के लिए आते हैं।"

टिप्पणी

कोर्ट ने कहा- मेट्रो और रेल पूरी तरह बंद नहीं कर सकते

कोर्ट ने सरकार से कहा, "सब कुछ बंद नहीं किया जा सकता क्योंकि लोग शहर के सभी हिस्सों से यात्रा करते हैं। युवा हों या बुजुर्ग, सभी यात्रा करते हैं। यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं का अधिकार है। प्रतिबंध और पूर्ण बंद में अंतर होता है। हमें गुरुग्राम, पूर्वी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली आदि से अपनी आजीविका के लिए यात्रा करने वाले लाखों लोगों की चिंता है। हर किसी के पास अपनी कार नहीं होती।"

CJI

CJI ने कहा- ध्यान रखें कि सबकुछ न थम जाए

CJI ने कहा, "आनुपातिकता का सिद्धांत ध्यान में रखना जरूरी है। उतना ही करें जितनी जरूरत हो। हो सकता है कि आपने बहुत ज्यादा सावधानी बरतने के लिए ऐसा किया हो, कानून-व्यवस्था आपकी जिम्मेदारी है। लेकिन यह सिर्फ राज्य की संपत्ति नहीं है। इसमें बेटियां, बुज़ुर्ग शामिल हैं। वे यात्रा करते हैं, उनकी सुरक्षा भी जरूरी है। उपायों में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन ध्यान रखें कि सब कुछ न रुके।"

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ट्विटर पोस्ट

दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशन बंद, देखें सूची

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वकील

कपिल सिब्बल बोले- ट्रेनें रद्द, मेट्रो बंद, ये क्या हो रहा है?

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पीठ के समक्ष मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों को रद्द करने का मुद्दा उठाया और कोर्ट से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, "सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं, मेट्रो स्टेशन बंद हैं। आप कहीं भी नहीं जा सकते। मेरे देश को क्या हो रहा है? यह एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन है।"

वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा, "आप अपनी अक्षमता के कारण पूरे शहर को बंद नहीं कर सकते।"

कोर्ट

जस्टिस बागची बोले- प्रदर्शन कानून के अनुसार ही किया जाना चाहिए 

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, "आइए इसे कानून के नजरिए से देखें। इसमें कोई संदेह नहीं है कि संगठन बनाने का अधिकार है, लेकिन इसका प्रयोग कानून के अनुसार ही किया जाना चाहिए। अगर विरोध प्रदर्शन अनुमति से किया जाता है, तो यह कानूनी विरोध प्रदर्शन है। भले ही यह कानून का सख्ती से पालन न करे। हम कभी यह नहीं कहते कि लोगों को विरोध करने का अधिकार नहीं है; हालांकि, वे ऐसा अपने जोखिम पर करते हैं।"

अनुमति

प्रदर्शन की दिल्ली पुलिस ने नहीं दी अनुमति

वहीं, दिल्ली पुलिस ने कहा कि CJP को प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने बताया कि CJP की ओर से 7 अक्टूबर को अनुमति के लिए आवेदन मिला था, लेकिन नियमानुसार 10 दिन पहले आवेदन दिया जाना चाहिए।

वहीं, पुलिस ने ये भी कहा कि पिछले प्रदर्शन के दौरान CJP ने नियमों का पालन नहीं किया। इसलिए इन वजहों को देखते हुए इस बार अनुमति नहीं दी गई है।

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