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सुप्रीम कोर्ट का बंगाल सरकार को आदेश, कर्मचारियों को 25 प्रतिशत DA का भुगतान करे
DA भुगतान को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है

सुप्रीम कोर्ट का बंगाल सरकार को आदेश, कर्मचारियों को 25 प्रतिशत DA का भुगतान करे

लेखन आबिद खान
Feb 05, 2026
01:36 pm

क्या है खबर?

पश्चिम बंगाल सरकार और कर्मचारियों के बीच लंबे समय से महंगाई भत्ते (DA) को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने करीब 20 लाख सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए सरकार को निर्देश दिया है कि वो 2008 से 2019 तक की अवधि का DA बकाया भुगतान करे। कोर्ट ने कहा कि पहले के अंतरिम आदेश के अनुसार बकाया राशि का कम से कम 25 प्रतिशत 6 मार्च तक जारी होना चाहिए।

भुगतान

कैसे होगा DA का भुगतान?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बकाया DA का 25 प्रतिशत हिस्सा 6 मार्च तक दिया जाए। साथ ही कोर्ट ने बकाया 75 प्रतिशत भुगतान किस्तों मे कैसे किया जाए, ये तय करने के लिए कोर्ट ने एक समिति गठित करने का आदेश दिया। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में समिति का गठन किया है। इसमें जस्टिस तरलोचन सिंह चौहान और जस्टिस गौतम विधूडी और CAG अधिकारी भी होंगे।

आदेश

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

कोर्ट ने DA को कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार करार देते हुए कहा कि ROPA नियमों के तहत परिलब्धियों की गणना के लिए ये जरूरी है। राज्य की वित्तीय क्षमता भत्ते से इनकार करने का वैध आधार नहीं हो सकती। DA स्थिर नहीं बल्कि गतिशील है, जिसमें बदलाव की गुंजाइश नियमों में मौजूद है। राज्य सरकार द्वारा DA नियमों में किए गए बदलाव 'मनमाने' और 'सनकी' हैं। कर्मचारी साल में 2 बार DA के हकदार नहीं थे।

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अंतरिम आदेश

ममता सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती

दरअसल, मई, 2022 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वो जुलाई, 2008 से लंबित DA का 3 महीने के भीतर भुगतान करे। ममता सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 16 मई, 2025 को अपने अंतरिम आदेश में राज्य सरकार को कहा था कि वह कुल बकाया DA का कम से कम 25 प्रतिशत 3 महीने में कर्मचारियों को दे।

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कर्मचारी

करीब 20 लाख कर्मचारियों को राहत

कोर्ट के फैसले से पश्चिम बंगाल के 20 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को राहत मिलेगी। राज्य सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस आदेश के बाद उसे करीब 43,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। इस विवाद की शुरुआत पश्चिम बंगाल सेवा (वेतन और भत्ते का संशोधन) नियम, 2009 से हुई थी, जिसे 2008 में 5वें वेतन आयोग के गठन के बाद बनाया गया था। 2016 में कर्मचारी DA की गणना और भुगतान में देरी को लेकर ट्रिब्यूनल में गए थे।

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