सुप्रीम कोर्ट से प्रदर्शनकारी छात्रों को राहत; हिंसा की SIT जांच के आदेश, छात्र रिहा होंगे
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर और अन्य राज्यों में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शनों में शामिल प्रदर्शनकारियों को राहत दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया है। साथ ही, विभिन्न राज्यों में पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए नाबालिगों को तत्काल रिहा करने को कहा है।
आदेश
आपराधिक पृष्ठभूमि वालों को राहत नहीं
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह संरक्षण आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों पर लागू नहीं होगा। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल 989 अपराधियों को चिन्हित किया है।
कोर्ट ने ऐसे विरोध प्रदर्शनों से संबंधित सभी CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा है।
कोर्ट ने निर्देश दिए कि पुलिस द्वारा रिकॉर्ड प्रदर्शनकारियों के डिजिटल डेटा और व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।
आदेश
हिंसा की जांच करेगी SIT
कोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा की गई ज्यादतियों के आरोप प्रथम दृष्टया निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच का मामला बनाते हैं। उसने हिंसक घटनाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा है।
कोर्ट ने संकेत दिया कि वह जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर सकता है।
उसने केंद्र, असम, बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है।
जांच
पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों को दर्ज किया
कोर्ट ने ध्यान दिया कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिससे छात्रों में चोटें आईं, जिनमें एक लड़के ने अपनी आंखों की रोशनी खो दी है।
कोर्ट को बताया गया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तैनात बलों द्वारा कथित तौर पर रबर की गोलियां, बिजली के डंडे और कीलों से जड़ी लाठियों का भी इस्तेमाल किया गया था।
कोर्ट ने सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों को तैनात करने का आरोप भी दर्ज किया है।
आदेश
जुर्म करने वालों को सजा देगा कानून- CJI
सुप्रीम कोर्ट पेपर लीक के खिलाफ देशभर में 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की बर्बरता के आरोपों वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
इस दौरान कोर्ट ने घायल पुलिस अधिकारियों और मीडियाकर्मियों की याचिकाओं को भी सुना।
CJI ने सुनवाई में कहा, "जिस किसी ने भी अत्याचार और निर्दोष लोगों पर ज़ुल्म किए हैं, कानून उन्हें सजा देगा। इसके लिए स्वतंत्र-निष्पक्ष जांच जरूरी है। जिम्मेदारी तय नहीं होती तो जांच का कोई मतलब नहीं।"