सुप्रीम कोर्ट ने दहेज और क्रूरता के मामले में 10 निर्देश जारी किए, क्या है ये?
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज और महिलाओं के खिलाफ क्रूरता से संबंधित मुकदमों में तेजी लाने के लिए सभी अदालतों और सरकारों को 10 विशेष निर्देश जारी किया है। बार एंड बेंच के मुताबिक, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति अटॉर्नी जनरल मसीह की पीठ ने 20 अगस्त को यह निर्देश तब दिया, जब कोर्ट उत्तर प्रदेश बनाम अजमल बेग मामले में दिसंबर 2025 के अपने फैसले के अनुपालन की निगरानी कर रहा था। क्या हैं ये निर्देश? आइए, जानते हैं।
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कोर्ट के पहले 5 निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज हत्या और पत्नी के साथ क्रूरता के मामलों को प्राथमिकता देने और 3 साल से अधिक समय से लंबित मामलों की जिला कोर्ट को पहचान करने और समय-समय पर प्रगति समीक्षा को कहा।
निचली कोर्ट को आरोपपत्र दाखिल होने के 60 से 90 दिन के भीरत आरोप तय करने और साक्ष्य एकत्र करने को कहा।
कोर्ट ने सुनवाई को अनावश्यक स्थगित करने से बचने और कारण दर्ज करने को कहा है।
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जमानत मामलों की समीक्षा का निर्देश
कोर्ट ने हाई कोर्ट को दहेज मामलों की चरण-वार लंबितता पर नजर रखने और पुराने मामलों के लिए अलर्ट जारी करने को कहा है।
उसने हाई कोर्ट को समय-समय पर पुराने आपराधिक और दहेज संबंधी अपीलों से जुड़े जमानत मामलों की समीक्षा को कहा है।
उसने राज्यों और हाई कोर्ट को न्यायिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, अभियोजकों, संरक्षण अधिकारियों और परामर्शदाताओं के लिए नियमित प्रशिक्षण आयोजित करने को कहा है।
साथ ही, जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाने को कहा है।
कारण
सुप्रीम कोर्ट को क्यों पड़ी निर्देश जारी करने की जरूरत?
मामला 20 वर्षीय एक महिला की मौत से जुड़ा है, जिसमें उसकी शादी के एक साल बाद रंगीन टीवी, मोटरसाइकिल और 15,000 रुपये मांगे गए थे।
निचली कोर्ट ने महिला के पति अजमल बेग और सास को दोषी ठहराया, लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला पलट दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने उनको दोषी ठहराया और कहाकि हाई कोर्ट ने साक्ष्यों के मूल्यांकन में गलती की थी।
मामला 2001 का था, जिसका फैसला 24 साल बाद आया। इससे सुप्रीम कोर्ट नाराज था।