सुप्रीम कोर्ट का फैसला- बंद कमरे में जातिवादी अपशब्द बोले तो 'सार्वजनिक प्रदर्शन' नहीं
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा है कि बंद कमरे में बोले गए जातिवादी अपशब्दों को सीधे तौर पर 'सार्वजनिक प्रदर्शन' नहीं माना जा सकता। यह फैसला SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट के सेक्शन 3(1)(R) और 3(1)(S) से जुड़ा है।
यह मामला तब सामने आया था, जब एक स्कूल मैनेजर पर एक अभिभावक के साथ बंद कमरे में हुई बहस के दौरान ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगा था।
जाति से जुड़े आरोप हटा दिए गए
जजों ने बताया कि इन अपशब्दों को अपराध मानने के लिए, इन्हें ऐसी जगह बोला जाना चाहिए जहां दूसरे लोग भी सुन सकें। सिर्फ निजी तौर पर बोल देना काफी नहीं है।
एक तरफ जहां जाति से जुड़े आरोप हटा दिए गए हैं, वहीं स्कूल मैनेजर के खिलाफ हमले जैसे दूसरे आरोपों पर कार्रवाई जारी रहेगी। यह फैसला भविष्य में आने वाले ऐसे ही मामलों पर अहम असर डालेगा।