Loading...
सुप्रीम कोर्ट ने 'एक देश, एक चुनाव' को लेकर संसदीय समिति के साथ बैठक रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने 'एक देश, एक चुनाव' को लेकर संसदीय समिति के साथ बैठक रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने 'एक देश, एक चुनाव' को लेकर संसदीय समिति के साथ बैठक रद्द की

लेखन गजेंद्र
Oct 02, 2026
06:35 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को संसदीय समिति के साथ प्रस्तावित 'एक देश, एक चुनाव' को लेकर होने वाली बैठक को रद्द कर दिया है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा करना 'उचित या वांछनीय' नहीं हो सकता है, इसलिए यह बैठक रद्द की जाती है। बता दें कि बैठक को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद कपिल सिब्बल ने इस पर आपत्ति जताई थी।

बैठक

बैठक में क्या होना था?

चुनाव आयोग ने 28 सितंबर को एक ईमेल से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और अन्य न्यायाधीशों के साथ 'अनौपचारिक बातचीत' का अनुरोध किया था, जिसे उसने 'स्थानीय अध्ययन यात्रा' बताया था।

यह अनुरोध विधि और न्याय मंत्रालय के विधायी मामलों के विभाग से भेजा गया था।

इस बातचीत में CJI, अन्य न्यायाधीशों और संविधान के 129वां संशोधन विधेयक 2024 की जांच करने वाली संसदीय समिति शामिल होनी थी।

इसी विधेयक में 'एक देश, एक चुनाव' का प्रावधान है।

इनकार

कोर्ट ने क्या कहकर बैठक से इनकार किया?

सुप्रीम कोर्ट ने महासचिव कार्यालय के माध्यम से ईमेल का जवाब देते हुए विधायी विभाग को सूचित किया कि "वरिष्ठ न्यायाधीशों" ने प्रस्ताव पर चर्चा की थी।

पत्र में कहा गया, "उनका मत है कि प्रस्तावित संशोधन सुप्रीम कोर्ट के समक्ष न्यायिक समीक्षा का विषय बन सकता है, इसलिए प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा करना उचित या वांछनीय नहीं होगा। तदनुसार प्रस्तावित बैठक रद्द की जाती है। असुविधा के लिए खेद है।"

ADVERTISEMENT

समर्थन

संसदीय समिति के अध्यक्ष ने क्या कहा?

एक साथ चुनाव संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष भाजपा सांसद और पूर्व कानून मंत्री पीपी चौधरी हैं।

उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि बैठक का उद्देश्य विधेयक पर चर्चा करना नहीं, बल्कि "सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट, उसकी लाइब्रेरी से परिचित कराने" के लिए था, क्योंकि कुछ सदस्य वहां कभी नहीं गए।

सांसद सिब्बल की आपत्ति मौजूदा न्यायाधीशों के साथ बैठक को लेकर थी, जो अंततः कानून की संवैधानिकता पर फैसला सुना सकते हैं।

उन्होंने इसे 'संविधान का मजाक' बताया।

ADVERTISEMENT