स्मार्ट सिटी के तहत पूरे शहर का नहीं होना था विकास, केंद्र सरकार ने बताया
क्या है खबर?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार से स्मार्ट सिटी को लेकर सवाल पूछा था, जिसका जवाब मिलने पर उन्होंने इसे फेसबुक पर साझा किया है। आवासन शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कांग्रेस नेता के सवाल पर बताया कि स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य पूरे शहर का विकास करना नहीं था, बल्कि रेट्रोफिटिंग समेत एक क्षेत्र विकास दृष्टिकोण का पालन करना था। राहुल ने इस जवाब को फेसबुक पर साझा कर योजना को धोखा बताया।
मिशन
पूरे शहर का विकास करना नहीं था उद्देश्य
राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने संसद में सरकार से सवाल पूछा था, "स्मार्ट सिटी कैसे होते हैं?, सफलता किस आधार पर तय हुई?, कितने शहर सच में बदले?, लोगों के जीवन में क्या ठोस बदलाव आया? जिस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया। सिर्फ बताया गया की करीब 48,000 करोड़ खर्च हुए, और 97 प्रतिशत प्रोजेक्ट पूरे बता दिए, लेकिन अगर सब पूरा है, तो आपके शहर में क्या बदला? जमीनी हकीकत अलग कहानी कहती है।"
योजना
केंद्रीय हिस्से का 99 प्रतिशत उपयोग कर चुके हैं शहर
राज्य मंत्री ने संसद में लिखित जवाब में बताया कि केंद्र सरकार ने 100 शहरों के लिए स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 48,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया था, जिसमें 99 प्रतिशत उपयोग हो चुका है। सभी शहरों में कुल 1,64,811 करोड़ रुपये की 8,064 परियोजनाएं शुरू की गई थी, जिसमें 7,784 परियोजनाएं पूरी हो चुकी है। अभी 8,652 करोड़ रुपये की 280 परियोजनाओं का काम अभी चल रहा है। यह आंकड़े 1 मार्च, 2026 तक है।
योजना
तो क्या पूरे शहर का नहीं होना था कायाकल्प?
मंत्री ने बताया कि स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य पूरे शहर का विकास करना नहीं था, बल्कि रेट्रोफिटिंग, पुनर्विकास, ग्रीनफील्ड विकास और पैन सिटी पहल के जरिए एक क्षेत्र-आधारित विकास दृष्टिकोण का पालन करना था। मंत्री ने बताया कि इसके अंतर्गत शहर के बड़े हिस्से को कवर करके स्मार्ट समाधान कार्यान्वित किए जाते हैं, ताकि एक प्रतिकृति योग्य मॉडल तैयार किए जा सकें। उत्तर प्रदेश में मिशन के तहत लखनऊ, कानपुर, आगरा समेत 10 शहरों का चुनाव हुआ था।