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पानी नहीं बर्फ पर भी उतर सकता है यह सी-प्लेन, गंगा की लहरों पर हुआ परीक्षण
कंवर्टेड सी-प्लेन को अंतिम लाइसेंस मिलने के बाद अंडमान-निकोबार में तैनात किया जाएगा

पानी नहीं बर्फ पर भी उतर सकता है यह सी-प्लेन, गंगा की लहरों पर हुआ परीक्षण

Apr 07, 2026
04:26 pm

क्या है खबर?

स्काईहॉप एविएशन ने उत्तराखंड़ के हरिद्वार में गंगा बैराज में एक कंवर्टेड सी-प्लेन का सफल परीक्षण किया गया। यह भारत में वाणिज्यिक परिचालन शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस परीक्षण में डी हैविलैंड DHC-6 ट्विन ऑटर नामक 19 सीटों वाले विमान का उपयोग किया गया, जो जल निकायों, छोटे रनवे और दुर्गम भूभाग से उड़ान भरने में सक्षम है। आइये जानते हैं इस विमान की क्या खासियत है और इस परीक्षण का क्या फायदा होगा।

खासियत 

इन सुविधाओं से लैस है यह विमान 

भारत में पहली बार किसी विमान को पानी पर उतरने वाले उपकरण लगाकर सी-प्लेन में बदला गया। इसको पहियों, सीधे फ्लोट्स या स्की के लिए कॉन्फिगर करने के लिए डिजाइन किया है, जिससे यह पानी, बर्फ और ऊबड़-खाबड़ हवाई पट्टियों पर टेक-ऑफ और लैंडिंग सकता है। इसे उड़ान भरने के लिए लगभग 1,200 फीट और उतरने के लिए 1,050 फीट की जगह चाहिए। इसमें कम गति पर उड़ान भरने की क्षमता है और इसे मजबूत एयरफ्रेम से बनाया गया है।

फायदा 

सी-प्लेन से क्या होगा फायदा?

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से अंतिम लाइसेंस मिलने के बाद इसे अंडमान-निकोबार में संचालन के लिए तैनात किया जाएगा। सी-प्लेन का संचालन शुरू होने से चारधाम यात्रा, एडवेंचर टूरिज्म और वीकेंड ट्रैवल को बढ़ावा मिलेगा। देश-विदेश के पर्यटक कम समय में सीधे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच सकेंगे। ऐसे दुर्गम क्षेत्र जहां सड़क या पारंपरिक हवाई सेवाएं पहुंचना मुश्किल हैं, वहां पर्यटक आसानी से पहुंच पाएंगे और बाढ़ या आपात स्थिति में पानी पर उतरकर राहत कार्य आसान बनाएगा।

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