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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार; सरकार को दिए कानून बनाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथ पर चलने को मौलिक अधिकार माना है

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- फुटपाथ पर चलना मौलिक अधिकार; सरकार को दिए कानून बनाने के निर्देश

लेखन आबिद खान
Jun 19, 2026
03:44 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुरक्षित फुटपाथ पर चलना संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने अनुच्छेद 19(1)(द) के तहत मिलने वाली आवागमन की स्वतंत्रता में पैदल चलने का अधिकार भी शामिल है। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वे ऐसा कानून लाने पर विचार करे, जो इस अधिकार को मान्यता दे और नगर निकायों व स्थानीय संस्थाओं की इस जिम्मेदारी को भी स्वीकार करे कि वे पैदल चलने वालों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा बनाए।

टिप्पणी

कोर्ट ने कहा- वाहनों की तुलना में पैदल चलने वालों को प्राथमिकता

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने कहा, "चलने का अधिकार संविधान के भाग III के तहत एक मौलिक अधिकार है। यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(द) के साथ-साथ अनुच्छेद 19(1)(अ), 19(1)(ब), 19(1)(स) और अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत आवाजाही के अधिकार का एक अहम हिस्सा है। चलने के मौलिक अधिकार में ही तय फुटपाथ का अधिकार भी शामिल है। ये अधिकार प्राथमिक हैं और मोटर वाहनों से आवाजाही की तुलना में इन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।"

बयान

कोर्ट बोला- सरकार बुनियादी ढांचे बनाएं

कोर्ट ने कहा, "अगर सड़क है, तो यह सुनिश्चित करना जिम्मेदारी है कि पैदल चलने वालों के लिए तय और अच्छी तरह से बनाए गए फुटपाथ हों। शहरी विकास प्राधिकरण, नगर निगम, नगरपालिकाएं और यहां तक ​​कि पंचायतें भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। उन्हें फुटपाथ और पैदल चलने वालों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे को तय करने, बनाने, बनाए रखने और सुरक्षित रखने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि चलना जीवन का एक अहम हिस्सा है।"

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फुटपाथ

नगर निकाय केवल वाहनों के लिए रास्ते बनाते रहे- कोर्ट

कोर्ट ने कहा, "यह अजीब बात है कि हम पैदल चलने के अधिकार को पहचानने और सुरक्षित करने पर ध्यान नहीं दे पाते। हो सकता है ऐसा इसलिए हो, क्योंकि गाड़ियों ने हमारी सोच पर कब्जा कर लिया। नगर निकाय ऐसे रास्ते बनाते रहे, जो वाहनों के लिए सही थे। शुरुआत में वाहन सिर्फ अमीरों के लिए थीं, इसलिए यह कुलीन सोच भी हो सकती है। पैदल चलने वालों को किनारे किया गया और उन्हें परेशानी माना जाने लगा।"

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मामला

5 साल के बच्चे की मौत से उठा मामला

इस मामले की शुरुआत एक सड़क हादसे में 5 साल के बच्चे की मौत से हुई। ये बच्चा अपने पिता के साथ स्कूल जा रहा था, तभी एक टैंकर ने उसे कुचल दिया। हादसे में बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद ये मामला मोटर एक्सीडेंट्स क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) से होते हुए हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने पाया कि दुर्घटना स्थल पर न तो फुटपाथ था और न ही पैदल यात्रियों के लिए कोई सुरक्षित क्रॉसिंग।

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