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सबरीमाला सोना चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की केपी शंकरदास की याचिका, जानिए क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर से सोना चोरी होने के मामले में खारिज की केपी शंकरदास की याचिका

सबरीमाला सोना चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की केपी शंकरदास की याचिका, जानिए क्या कहा

Jan 05, 2026
05:22 pm

क्या है खबर?

सबरीमाला मंदिर से करोड़ों रुपये का सोना चोरी होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व सदस्य केपी शंकरदास द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि TDB की कार्यवाही पर हस्ताक्षर करने वाले शंकरदास जिम्मेदारी से नहीं बच नहीं सकते हैं। ऐसे में कोर्ट ने मामले में केरल हाई कोर्ट के फैसले से 5 अनुच्छेदों को हटाने की उनकी मांग को भी खारिज कर दिया है।

टिप्पणी

कोर्ट ने क्या की टिप्पणी?

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की पीठ ने कहा, "आपने भगवान को भी नहीं बख्शा। कम से कम मंदिर और देवता को तो अछूता छोड़ देना चाहिए था। बोर्ड सदस्य के रूप में शंकरदास भी सबरीमाला अयप्पा मंदिर में कथित सोने की लूट के लिए जिम्मेदार थे। ऐसे में केरल हाई कोर्ट की ओर से उनको लेकर की गई टिप्पणियों को नहीं हटाया जा सकता है।" इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।

नाम

सोने की चोरी में कैसे आया शंकरदास का नाम? 

दरअसल, केरल हाई कोर्ट द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (SIT) सोने की परत चढ़ी तांबे की थालियों और मंदिर की अन्य कलाकृतियों के गायब होने की जांच कर रहा है, जिन्हें इलेक्ट्रोप्लेटिंग और मरम्मत के लिए सौंपा गया था। बाद में उनमें पहले की तुलना में कम सोना पाया गया। SIT को संदेह है कि सोने की हेराफेरी की गई और उसे बेचा गया। SIT की रिपोर्ट पर हाई कोर्ट ने शंकरदास को भी चोरी के लिए जिम्मेदार माना।

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टिप्पणी

हाई कोर्ट ने शंकदास को लेकर क्या की थी टिप्पणी?

हाई कोर्ट ने मामले में कहा था कि भले ही SIT ने सोने की चोरी के लिए उन्नीकृष्णन पोट्टी को मुख्य आरोपी बनाया है, लेकिन TDB के पूर्व सदस्य शंकरदास और के विजयकुमार इस आपराधिक साजिश के आरोपों से बच नहीं सकते हैं। इसके अलावा कोर्ट ने उनके पद के दुरुपयोग को लेकर भी कई आलोचनात्मक टिप्पणी करते हुए SIT को मामले की जांच के संबंध में उनसे सभी आवश्यक पूछताछ करने के आदेश दिए थे।

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याचिका

शंकरदास ने याचिका में क्या कहा?

शंकरदास ने हाई कोर्ट की टिप्पणियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में तर्क दिया कि कोर्ट ने ये टिप्पणियां उनकी बात सुने बिना ही कर दी। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि तत्कालीन बोर्ड सदस्यों की आपराधिक जिम्मेदारी से संबंधित उच्च न्यायालय की टिप्पणियों को हटा दिया जाए, क्योंकि ऐसी टिप्पणियां निष्पक्ष जांच को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देकर राहत की मांग की थी।

मामला

क्या है मंदिर से सोना चोरी होने का मामला?

2019 में सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह के प्रवेश द्वार के दोनों ओर स्थित द्वारपालों की मूर्तियों पर चढ़ी सोने की परतों को मरम्मत के लिए चेन्नई भेजा गया था। जब त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड की ओर से इन परतों को मरम्मत के लिए भेजा था, तब उनका वजन 42.8 किलोग्राम था। हालांकि, जब मरम्मत के बाद ये वापस आईं, तो वजन घटकर 38 किलोग्राम रह गया। अक्टूबर, 2025 में केरल हाई कोर्ट ने जांच का आदेश दिया था।

जांच

अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?

सबरीमाला मामले में बिचौलिए उन्नीकृष्णन, देवस्वम बोर्ड के डिप्टी कमिश्नर मुरारी बाबू, सचिव जयश्री, कार्यकारी अधिकारी सतीश, प्रशासनिक अधिकारी श्रीकुमार और बैजू समेत 9 अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। देवस्वोम बोर्ड के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी एस शिवकुमार को गिरफ्तार भी किया गया है। आरोप है कि उन्होंने कर्नाटक के बेल्लारी के गोवर्धन नामक एक व्यापारी को 400 ग्राम सोना दिया था। अब नए खुलासे के बाद सत्ताधारी पार्टी CPI(M) पर और दबाव बढ़ सकता है।

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