कांवड़ यात्रा का शोर 90 डेसीबल पार, रातों की नींद हराम; प्रशासन मौन?
दिल्ली के रमेश नगर के B-ब्लॉक में रहने वाले लोग इन दिनों काफी दिक्कत झेल रहे हैं। असल में, उनके इलाके में मेट्रो स्टेशन के ठीक नीचे कांवड़ यात्रा के कैंप लगाए गए हैं। इन कैंपों से बजने वाला संगीत इतना तेज है कि घरों के अंदर भी शोर का स्तर 90 डेसीबल से ज्यादा पहुंच रहा है। यह 55 डेसीबल की सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ऐसा शोर सिर्फ चिढ़ाने वाला नहीं होता, बल्कि ये सुनने की क्षमता को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
कैंपों की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी पर असर
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन कैंपों से निकलने वाले लगातार संगीत और बेस की तेज आवाज के चलते घर में ठीक से सो पाना या कामकाज और पढ़ाई पर ध्यान देना लगभग नामुमकिन हो गया है। एक कैंप के ठीक सामने रहने वाले गुरबीर सिंह ने बताया कि पिछले 3 दिनों से उन्हें ठीक से नींद नहीं आई है। "हमें इन दिनों से डर लगता है," उन्होंने अपनी बात रखी।
यही नहीं, इन कैंपों के आसपास लगने वाले ट्रैफिक जाम और कचरे के ढेर ने उनकी रोजमर्रा की जिदगी को और मुश्किल बना दिया है। हालात ये हैं कि रास्ते बंद होने की वजह से माता-पिता को अपने बच्चों को स्कूल से सीधे घर लाने जाना पड़ रहा है। लोगों ने इस बारे में पुलिस से शिकायत भी की है, लेकिन उनकी मानें तो अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।