जंतर-मंतर प्रदर्शन पर रमेश बिधूड़ी का विवादित बयान, कहा- छात्रों से ज्यादा थे 'पंचर बनाने वाले'
क्या है खबर?
भाजपा नेता और पूर्व संसाद रमेश बिधूड़ी ने NEET पेपर लीक के खिलाफ हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उस प्रदर्शन में छात्रों से ज्यादा टायर पंक्चर बनाने वाले और ताला बनाने वालों की संख्या ज्यादा था। उन्होंने यह बयान दक्षिण दिल्ली के तुगलकाबाद में आयोजित एक Gen-Z सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिया है।
बयान
बिधूड़ी ने क्या दिया बयान?
बिधूड़ी ने प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा, "क्या भारत के बेटे-बेटियां प्रधानमंत्री मोदी और उनके परिवार के बारे में इस तरह की बातें कर सकते हैं? वे जरूर टायर पंचर ठीक करने वालों के बच्चे होंगे जो प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।"
बता दें कि अपशब्दों के मामले में प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को माफ कर दिया है।
निशाना
बिधूड़ी ने विपक्ष पर भी साधा निशाना
दक्षिण दिल्ली से 2 बार के पूर्व सांसद बिधूड़ी ने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं को गुमराह करके जंतर-मंतर पर इकट्ठा किया गया था ताकि वे CJP के नेतृत्व में NEET पेपर लीक मामले में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर सकें।
उन्होंने कहा, ""जंतर-मंतर पर पंचर ठीक करने वाले और ताला ठीक करने वाले अधिक संख्या में मौजूद थे। छात्रों की संख्या कम थी।"
ट्विटर पोस्ट
यहां देखें बिधूड़ी का पूरा वीडियो
BJP leader Ramesh Bidhuri, known for his use of abusive language, claims that the Gen-Z protesters at Jantar Mantar were not students but 'puncture wale'.
— Bhavesh Makwana (@Bhaveshmakwana_) August 3, 2026
So, does that mean puncture wale forced Ramesh Bidhuri father to resign? pic.twitter.com/zpHchIwS31
माफी
प्रधानमंत्री मोदी ने दी युवाओं को माफी
इससे पहले 1 अगस्त को इंस्टाग्राम और ट्विटर पर देर रात पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि उनकी दिवंगत मां को भी जंतर-मंतर पर भद्दी गालियों का सामना करना पड़ा और उन्होंने युवा महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर सांस्कृतिक आघात व्यक्त किया।
हालांकि, उन्होंने गुमराह बच्चों को माफ करने का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें दंडित करने के बजाय मार्गदर्शन मिलना चाहिए।