भारतीय बाजार में 2027 की शुरुआत में आएगी डेंगू के खिलाफ पहली वैक्सीन 'क्यूडेंगा'
क्या है खबर?
भारत में डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच बड़ी राहत की खबर आई है। देश की पहली डेंगू वैक्सीन 'क्यूडेंगा' (QDENGA) साल 2027 की शुरुआत में भारतीय बाजार में उपलब्ध हो सकती है। संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ चंद्रकांत लहरिया और वैक्सीन निर्माता जापानी कंपनी 'टाकेडा फार्मास्युटिकल' के अनुसार, इस वैक्सीन के साल 2027 की पहली छमाही में निजी स्वास्थ्य सेवा केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध होने की पूरी उम्मीद है। आइए इसके बारे में जानते हैं।
वैक्सीन
क्या है 'क्यूडेंगा' वैक्सीन और यह कैसे काम करती है?
'क्यूडेंगा' एक 'लाइव-अटेनुएटेड टेट्रावैलेंट' वैक्सीन है। इसे डेंगू वायरस के चारों खतरनाक सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) से सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।
पुरानी डेंगू वैक्सीन (डेंगवैक्सिया) के विपरीत, क्यूडेंगा लगवाने से पहले किसी व्यक्ति को यह जांचने के लिए ब्लड टेस्ट कराने की आवश्यकता नहीं होती कि उसे पहले कभी डेंगू हुआ था या नहीं। ऐसे में यह इसकी सबसे बड़ी खूबी है।
मान्यता
'क्यूडेंगा' को 42 से अधिक देशों ने दी मान्यता
इस वैक्सीन को यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम (UK), ब्राजील, इंडोनेशिया और अर्जेंटीना सहित 42 से अधिक देशों में पहले ही मान्यता मिल चुकी है।
ऐसे में अब भारत भी इस सूची में शामिल हो गया है। यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष की आयु के बच्चों और वयस्कों में डेंगू की रोकथाम के लिए उपयुक्त है।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने 21 जुलाई, 2026 को भारत में इस वैक्सीन को मान्यता देने की घोषणा की थी।
सवाल
किसे लगानी चाहिए वैक्सीन और कौन हैं इसके पात्र?
डॉ लहरिया के अनुसार, मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप और फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित वयस्कों को इसे प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि उन पर संक्रमण का असर घातक हो सकता है।
इसी तरह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एलर्जी की समस्या रखने वाले, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले, कीमोथेरेपी या हाई-डोज वाली कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स जैसी दवाइंया लेने वाले, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को यह वैक्सीन लगवाने से बचाना चाहिए।
कीमत
खुराक और भारत में कीमत
क्यूडेंगा वैक्सीन को त्वचा के नीचे इंजेक्ट किया जाता है। इसकी 2 खुराकें दी जाती हैं, जिनके बीच 3 महीने का अंतर रखना जरूरी होता है।
हालांकि, कंपनी द्वारा भारत के लिए अभी आधिकारिक कीमत की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन टाकेडा ने हैदराबाद स्थित भारतीय कंपनी 'बायोलॉजिकल ई' के साथ मैन्युफैक्चरिंग साझेदारी की है।
इसके तहत भारत में सालाना 5 करोड़ खुराक तैयार की जाएगी। इससे इसकी कीमत काफी कम और किफायती रहने की उम्मीद है।