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प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य-पूर्व संकट पर की उच्च स्तरीय बैठक, जानिए किन मुद्दों पर हुई चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य-पूर्व संकट पर उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की है

प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य-पूर्व संकट पर की उच्च स्तरीय बैठक, जानिए किन मुद्दों पर हुई चर्चा

Mar 22, 2026
05:58 pm

क्या है खबर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य-पूर्व संकट के बीच रविवार को अपने आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। करीब साढ़े 3 घंटे चली इस बैठक में उन्होंने वरिष्ठ मंत्री और अधिकारियों की मौजूदगी में पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक जैसे प्रमुख क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की। यह समीक्षा मध्य-पूर्व संकट से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के बाधित होने के बीच हुई है। बैठक का उद्देश्य तेल, गैस, खाद समेत सभी जरूरी चीजों की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखना है।

मौजूदगी

बैठक में मौजूद रहे ये मंत्री और अधिकारी

इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रसायन और उर्वरक और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिहं पुरी, श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी आदि शामिल थे। इनके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के दोनों मुख्य सचिव और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

हालात

मंत्रियों और अधिकारियों ने दी हालातों की जानकारी

महत्वपूर्ण मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों और हितधारकों ने प्रधानमंत्री को मौजूदा स्टॉक स्तर, आयात पर निर्भरता और किसी भी संभावित व्यवधान से निपटने के लिए आकस्मिक योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद, प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें काफी हद तक अपरिवर्तित रही हैं। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती लागत के कारण हाल के दिनों में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर से अधिक की वृद्धि हुई है।

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चिंता

अधिकारियों ने LPG को लेकर जताई चिंता

बैठक में अधिकारियों ने द्रवित प्रेट्रोलियम गैस (LPG) की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कई शहरों में गैस एजेंसियों और CNG स्टेशनों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। इस पर प्रधानमंत्री माेदी ने कमी को रोकने, कीमतों को नियंत्रित करने और नागरिकों में घबराहट से बचने के लिए मंत्रालयों के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संकट के अधिक बढ़ने की स्थिति में आकस्मिक योजना को मजबूत करने के भी निर्देश दिए।

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प्रयास

मध्य-पूर्व संकट पर पहले से ही तैयारी कर रही है सरकार

मध्य-पूर्व संकट के बीच सरकार तेल, गैस, खाद की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए पहले से ही सक्रिय कदम उठा रही है। 12 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने मध्य-पूर्व तनाव से उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट को राष्ट्रीय चरित्र की एक महत्वपूर्ण परीक्षा बताते हुए शांति, धैर्य और जन जागरूकता के साथ प्रतिक्रिया देने के महत्व पर बल दिया था। उन्होंने समस्या के समाधान के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर भी जोर दिया था।

कदम

प्रधानमंत्री मोदी ने दी सरकार के प्रयासों की जानकारी

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं को दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा, "हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत हैं कि आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों को कैसे दूर किया जाए।' 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर हमले किए हैं।

परेशानी

होर्मूज जलडमरूमध्य के बंद होने से बढ़ी परेशानी

ईरान ने हमले के बाद ऊर्जा आपूर्ति के महत्वपूर्ण मार्ग होर्मूज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। इस मार्ग से वैश्विक तेल और द्रवीकृत गैस का 5वां हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग पर ईरान के नियंत्रण के कारण जहाजों की आवाजाही प्रतिबंधित हो गई है, जिससे भारत सहित वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईरान ने उस समय कहा था कि वह अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों तक एक लीटर तेल भी नहीं पहुंचने देगा।

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